भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से मीडिया के मंच पर मुकाबला करने के लिए कांग्रेस पार्टी अपने मीडिया तंत्र में बड़ा बदलाव कर सकती है। अभी तक मुख्य धारा की मीडिया में पार्टी की बात रखने के लिए बने मीडिया सेल के अलावा सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए अलग से सोशल मीडिया सेल का गठन किया गया है। किसी मुद्दे पर आवश्यक शोध करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम अलग से कार्य करती है, लेकिन बेहतर समन्वय के लिए अब इन सबको मिलाकर एक किया जा सकता है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य है कि मीडिया में पार्टी की बात ज्यादा मजबूती के साथ रखी जा सके।
पार्टी के एक नेता के मुताबिक, मीडिया में पार्टी की बात जोरदार तरीके से रखने के लिए प्रवक्ताओं को ज्यादा सूचना से लैस करने के लिए शोध टीम को मुख्य सेल के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे किसी मुद्दे पर पार्टी की बात रखने के लिए प्रवक्ताओं और अन्य नेताओं के पास ज्यादा सटीक और तथ्यपरक सूचना होगी। इससे पार्टी नेता अपनी बात प्रभावी ढंग से रख पाएंगे और जनता तक सही बात पहुंच सकेगी।
दरअसल, पार्टी का मानना है कि वर्तमान केंद्र सरकार हर मोर्चे पर यूपीए सरकार से पिछड़ रही है। विशेषकर आर्थिक मोर्चे पर सरकार बेहद कमजोर प्रदर्शन कर रही है और वह महंगाई-बेरोजगारी जैसे मुख्य मुद्दों पर जनता को कोई भी समाधान देने में असफल साबित हो रही है। लेकिन इन मुद्दों को मीडिया में सही तरीके से न उठा पाने के कारण बात जनता तक नहीं पहुंच पा रही है जिस कारण इसका लाभ पार्टी को नहीं मिल पा रहा है। पार्टी नेताओं का विचार है कि यदि इन मुद्दों को बेहतर तरीके से उठाया जा सके तो सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में मदद मिल सकती है।
इसे देखते हुए मीडिया सेल की कार्यप्रणाली में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। टीम में युवा नेताओं और प्रवक्ताओं को प्रमुख भूमिका दी जा सकती है। साथ ही मीडिया में बात रखने के पहले पार्टी नेताओं को तथ्यात्मक जानकारी से लैस किया जाएगा। पार्टी को उम्मीद है कि इससे उसकी बात मीडिया में ज्यादा मजबूत तरीके से रखी जा सकेगी।