केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2019 पेश किया। लोकसभा में चर्चा शुरू हुई और सरकार इसे पारित कराने की कोशिश में है। विधेयक पेश करते ही विपक्ष ने मतदान की मांग की तो इसके पक्ष में 293 वोट और विपक्ष में 82 वोट मिले।
कांग्रेस प्रवक्ता गौरव गगोई का कहना है कि विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विधेयक के सदन द्वारा पारित कराने को पाकिस्तान के कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की जीत बताया है।
लोकसभा सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि यह विधेयक संविधान के आधारभूत ढांचे का उल्लंघन करता है। मनीष तिवारी ने लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा कि भारत के संविधान में शरण देने के लिए मजहब को आधार नहीं बनाया गया है। कोई भी शरणार्थी वह चाहे जिस मजहब का हो, यदि भारत से शरण (मदद) मांगता है तो बिना उसका मजहब देखे हम उसे शरण दें। मगर इस विधेयक के प्रावधान में यहां विरोधाभास है।
अमित शाह ने लोकसभा में इस बिल को पेश करते हुए कहा कि भाजपा के 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा था। हालांकि उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है। यह किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी के साथ भेदभाव साबित कर दे तो वह इसे लोकसभा से वापस ले लेंगे। लोकसभा में विधेयक को पेश करने के बाद इसके प्रावधानों के बारे में अमित शाह ने बताया। गृहमंत्री ने कहा कि विधेयक संविधान के किसी अनुच्छेद की अवहेलना नहीं करता।
उन्होंने कहा कि मणिपुर में इनर लाइन परमिट लागू रहेगा। शाह ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा भारत सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से किसी का अधिकार छीना नहीं जा रहा है। हम बदलाव को स्वीकार करते हैं, बदलाव को समाहित करते हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को, पूर्वोत्तर के लोगों को बता देना चाहिए कि जो शरणार्थी जिस दिन से भारत में आए हैं, उनको उस दिन से यहां की नागरिकता दी जानी चाहिए।
केंद्र सरकार नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2019 को लोकसभा में आसानी से पारित करा लेगी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एआईएमआईएम ने विधेयक का खुलकर विरोध किया है। तीनों दल इसके खिलाफ हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बिल को संविधान की मर्यादा के खिलाफ बताया है। वहीं शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में सरकार द्वारा नागरिकता (संशोधन) विधेयक लाने पर सवाल उठाया है। मगर उसका रुख मतदान के समय साफ होगा। फिलहाल शिवसेना ने बिल को पेश करने के समय पक्ष में मतदान किया था। सरकार जद(यू) और जद(बीजू) का भी सहयोग मिला है।
नागरिकता (संशोधन) विधेयक की असली राजनीतिक लड़ाई राज्यसभा में होगी। राज्यसभा में सत्ता पक्ष के मुकाबले विपक्ष के सांसदों की संख्या ठीक-ठाक है। केंद्र सरकार के रणनीतिकार विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी दिलाने के लिए अभी से सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि आखिरी समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद कुछ दलों के नेताओं से बात कर सकते हैं। राज्यसभा में इस विधेयक को कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, डीएमके, एनसीपी समेत तमाम दलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है।