कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिलेगा या नहीं, अगर मिलेगा तो वह क्या गांधी परिवार से होगा या कोई दूसरा नेता पार्टी की कमान संभालेगा, यही चर्चा हो रही है। देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल से दूरी बनाने का सिलसिला खत्म नहीं हुआ है। केवल वरिष्ठ ही नहीं, बल्कि जूनियर नेता भी पार्टी छोड़ रहे हैं। पार्टी में बना जी-23 समूह तो पहले से ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को चुभन दे रहा है। राहुल गांधी न तो जूनियर और न ही सीनियर नेताओं का भरोसा जीत पा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है, ऐसा भी नहीं है कि देश में भाजपा ही भाजपा है। जनता का एक बड़ा वर्ग इस पार्टी को पसंद नहीं कर रहा, मगर विपक्षी दल उसे घेरने के लिए तैयार नहीं। दूसरी ओर, विपक्षी दलों की एक कमजोरी, भाजपा के हाथ लग गई है। राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दलों पर एक ही 'हथियार' से वार किया जा रहा है। मौजूदा समय में इस हथियार की काट किसी के पास नजर नहीं आ रही। 2024 से पहले यह कमजोरी, विपक्षी नेताओं को खूब परेशान करेगी।
प्रसिद्ध चिंतक, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राघव शरण शर्मा का कहना है, जैसा पुराने समय में होता था कि किसी राजा की मजबूत सेना को परास्त करना है, तो उसकी कोई एक कमजोरी पकड़ लो। उसके बाद किसी भीतरघाती की मदद से सेना पर वार शुरू कर दो। अंग्रेजी राज में ऐसा अनेकों बार हुआ था। कुछ वैसा ही आज देश में हो रहा है। कम से कम एक कमजोरी तो सभी पार्टियों में है। नेताओं ने सत्ता में रहते हुए खूब धन कमाया है। चाहे राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का नेता हो या क्षेत्रीय, रुपये पैसे के फेर में उसके फंसने की संभावना बनी रहती है। मौजूदा राजनीतिक हालात में अधिकांश दलों के प्रभावशाली नेताओं के साथ यही सब घटित हो रहा है। भाजपा के खिलाफ खड़े लोगों को नेतृत्व नहीं मिल पा रहा। विरोधी दल इस भूमिका के लिए खुद को तैयार करने में असफल साबित हो रहे हैं।
गुलाम नबी आजाद को भाजपा ने इन्हें समझ लिया, मगर कांग्रेस नहीं समझ पाई। पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे आजाद के जरिए भाजपा, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बना लेगी। देश के किसी भी हिस्से में अगर कोई जन नेता है तो वह देर सवेर टारगेट पर आ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, वजह खुले मैदान में इनसे टकराने के लिए भाजपा के पास चेहरा नहीं है। चूंकि वे नेता पैसे के चक्कर में फंसे हैं तो उनके पास दो ही विकल्प बचते हैं। एक भाजपा ज्वाइन करें या अपनी पार्टी में मौन साध कर बैठ जाएं।