फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EWS Quota: ईडब्ल्यूएस आरक्षण से एससी-एसटी और ओबीसी को अलग रखने का मामला, कांग्रेस कर रही ‘राजनीतिक समीक्षा’

Sat, 12 Nov 2022 11:38 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दो न्यायाधीशों की राय थी कि एससी, एसटी और ओबीसी को ईडब्ल्यूएस श्रेणी से बाहर करना असंवैधानिक है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 फीसदी आरक्षण से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़े जातियों को बाहर किए जाने के विषय पर कई पार्टियां विरोध कर रही हैं। तो वहीं कांग्रेस में इस बात पर मंथन चल रहा है कि इस मुद्दे पर विरोध किया जाए कि नहीं।

विज्ञापन


सूत्रों ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस का इस मुद्दे पर क्या रुख होगा, इसके लिए इन दिनों वह गहन ‘राजनीतिक समीक्षा’ कर रही है। उन्होंने कहा कि एक बार समीक्षा प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद फैसला किया जा सकता है कि क्या पार्टी किसी कानूनी उपाय का सहारा लेगी।

कांग्रेस महासचिव ने उठाए सवाल
वहीं कांग्रेस महासचिव प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 2004 से लगातार यह रुख अपनाया है कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के लिए मौजूदा आरक्षण को प्रभावित किए बिना सभी समुदायों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का समर्थन करती है। 
विज्ञापन


आगे जयराम रमेश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 3-2 के फैसले में जनवरी 2019 में संसद द्वारा पारित संविधान के 103वें संशोधन को बरकरार रखा है। सभी पांचों न्यायाधीश 103वें संविधान संशोधन में आर्थिक कमजोर श्रेणी (ईडबल्यूएस) के लिए आरक्षण देने पर सहमत थे। उनका कहना है कि तीन न्यायाधीशों ने राय दी है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी को बाहर रखा जा सकता है। उनमें से प्रत्येक ने अपनी-अपनी स्थिति के लिए अलग-अलग कारण बताए हैं।

उन्होंने कहा कि दो न्यायाधीशों की राय थी कि एससी, एसटी और ओबीसी को ईडब्ल्यूएस श्रेणी से बाहर करना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि कई अन्य दलों के साथ कांग्रेस ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन किया था, जबकि उसने इस पर अधिक विस्तृत जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति की मांग की थी। साथ ही कहा कि पांच न्यायाधीशों में से प्रत्येक ने इस संबंध में अनेक मुद्दों को उठाया है। कांग्रेस पार्टी इनका विस्तार से अध्ययन कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें