जीएसटी सुधार को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है। इस मुद्दे पर आज कांग्रेस के कई बड़े नेता और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी-अपनी बात रखी। किसी ने इस फैसले को यू-टर्न बताया तो किसी ने इस पर 'वन नेशन, नौ टैक्स' का तंज कसा। बता दें, सरकार के नए फैसले के अनुसार अब टैक्स स्लैब को सीमित करके केवल 5% और 18% रखा गया है।
नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। इससे रोटी-पराठा से लेकर तेल, आइसक्रीम, टीवी जैसे आम उपभोक्ता सामान सस्ते हो जाएंगे। वहीं, स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इस फैसले से मध्यम वर्ग और गरीब तबके को सीधी राहत मिलेगी। आइए जानते हैं टैक्स दरों के बदलाव पर विपक्ष के किस नेता ने क्या कहा?
चिदंबरम बोले सरकार ने लिया यू टर्न
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जीएसटी सुधार पर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने आठ साल तक गलत रास्ता अपनाया और अब मजबूरी में यू-टर्न लिया है। चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस और कई अर्थशास्त्रियों ने शुरू से ही सरकार को चेताया था कि जीएसटी की संरचना और दरें गलत हैं, लेकिन सरकार ने अनसुना किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह टैक्स शुरू से ही गुड एंड सिंपल टैक्स होना चाहिए था। उन्होंने इसे देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि अब जाकर सरकार को अपनी गलती का अहसास हुआ है।
जयराम रमेश के सवाल
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने जीएसटी सुधारों पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त के भाषण में ही दरों में कटौती की घोषणा कर दी थी, जबकि यह फैसला संवैधानिक निकाय जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद होना चाहिए था। रमेश ने पूछा कि क्या काउंसिल अब महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से जीएसटी 2.0 की मांग करती रही है, जिसमें दरें कम हों, एमएसएमई पर बोझ घटे और टैक्स चोरी व गलत वर्गीकरण की समस्या खत्म हो।
ये भी पढे़ें- 'उनके स्वागत में कुत्ते की तरह..', भाजपा विधायक की फिसली जुबान; महिला एसपी पर टिप्पणी मामले में FIR
उन्होंने कहा कि 2017 से ही कांग्रेस ने जीएसटी की खामियों की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन सरकार ने अनसुना किया। रमेश ने कहा कि मौजूदा सुधारों से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन असली जीएसटी 2.0 की प्रतीक्षा अब भी बाकी है। उन्होंने राज्यों के लिए मुआवजा पांच साल और बढ़ाने की मांग को भी अहम बताया। वहीं, जीएसटी परिषद ने 12% और 18% स्लैब को मिलाकर 5% और 18% की दो दरें तय की हैं।
प्रियांक खरगे बोले- वन नेशन, नौ टैक्स
कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने केंद्र के हालिया जीएसटी सुधारों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों से टैक्स दरें घटाने और ढांचा सरल बनाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। खरगे ने लिखा कि 'वन नेशन, वन टैक्स' की जगह 'वन नेशन, नौ टैक्स' लागू कर दिया गया।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने 2019 और 2024 के घोषणापत्रों में जीएसटी 2.0 का वादा किया था, ताकि किसानों, छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग को राहत मिले। उन्होंने दावा किया कि कुल जीएसटी वसूली का दो-तिहाई बोझ गरीबों और मध्यम वर्ग पर पड़ता है, जबकि अरबपतियों से केवल 3% जीएसटी आता है। उन्होंने सवाल किया कि अब जब सरकार ने दरें घटा दी हैं, तो राज्यों को नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी।
ये भी पढे़ें- 'कांग्रेस अपने समय में जीएसटी लागू करना असंभव मानती थी', वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पलटवार
ममता बनर्जी की पहल से हटा बीमा पर टैक्स- महुआ मोइत्रा
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी हटाने के फैसले का श्रेय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने दो अगस्त 2024 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर बीमा पर 18% जीएसटी हटाने की मांग की थी। मोइत्रा ने लिखा कि केंद्र ने यह फैसला अंततः लिया है, जिससे बीमा अब शून्य टैक्स श्रेणी में आ गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ बढ़ोतरी के दबाव को देखते हुए उठाया गया है।
बता दें, जीएसटी परिषद की बैठक में यह भी तय हुआ कि कई जरूरी स्वास्थ्य उपकरण जैसे थर्मामीटर, ऑक्सीजन, डायग्नोस्टिक किट और चश्मों पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है। वहीं, रोजमर्रा की वस्तुएं जैसे तेल, शैंपू, पेस्ट और साबुन भी अब 18% से घटकर 5% टैक्स श्रेणी में आ गई हैं।