कांग्रेस पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता चिरंजीब बिस्वाल और बाराबती-कटक विधायक मोहम्मद मोकीम को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया है। इससे पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति (DAC) ने पहले बिस्वाल और फिर मोकीम को नोटिस दिया और उनसे इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा था।
एआईसीसी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के सचिव तारिक अनवर ने एक अधिसूचना में कहा, 'दोनों नेताओं से मिले जवाबों पर सावधानीपूर्वक विचार किया गया। उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे। ऐसे में तदानुसार, डीएसी ने दोनों नेताओं को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित करने का फैसला किया है।'
आलाकमान के फैसले से परेशान हैं मोकीम
पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद विधायक मोहम्मद मोकीम ने कहा कि पार्टी आलाकमान के इस फैसले से वह परेशान हैं, क्योंकि उन्होंने वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं थे। मोकीम ने आगे कहा कि हमने हमेशा पार्टी को मजबूत करने के लिए काम किया है। पार्टी में मतभेद है और यही कारण है कि हम 20-23 वर्षों तक राज्य में सत्ता में नहीं आ पा रहे हैं। हम पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
ओपीसीसी अध्यक्ष ने की थी शिकायत
बता दें कि ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष शरत पटनायक ने एआईसीसी के समक्ष शिकायत की थी कि बिस्वाल और मोकीम दोनों पार्टी विरोधी गतिविधियों में लगे हुए हैं।
बसंता बिस्वाल के बेटे हैं चिरंजीब
उल्लेखनीय है कि बिस्वाल पहले भी दो बार कांग्रेस के टिकट पर ओडिशा विधानसभा के लिए चुने गए थे। वह पूर्व उपमुख्यमंत्री बसंता बिस्वाल के बड़े बेटे हैं। बिस्वाल 2014-19 तक विधानसभा में पार्टी के उपनेता थे। उन्होंने कई सालों तक ओडिशा में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था।
राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को दिया वोट
वही, अगर बात करें मोकीम की, तो वह कटक में कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह 2019 में पहली बार ओडिशा विधानसभा के लिए चुने गए। इससे पहले बाराबती-कटक विधायक ने 2022 में राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया था। मोकीम और बिस्वाल ने कुछ दिन पहले भी राज्य की राजधानी में हुई एक बैठक में ओपीसीसी की मौजूदा स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए थे।