राफेल लड़ाकू विमान पर सियासी घमासान थमता नहीं दिख रहा है। कांग्रेस ने रविवार को इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से अपना फैसला वापस लेने और सरकार के खिलाफ कोर्ट की अवमानना नोटिस जारी करने की मांग की। साथ ही राफेल सौदे की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की भी मांग दोहराई।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार ने झूठी सूचना देकर सुप्रीम कोर्ट को अंधेरे में रखा। खुद सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राफेल से जुड़ी सूचना सरकार ने सीएजी से साझा की है और सीएजी ने पीएसी से साझा की। जबकि हकीकत यह है कि इस सौदे से संबंधित जानकारी सरकार ने किसी से साझा नहीं की।
उन्होंने कहा कि सरकार की इसी जानकारी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अब यह बात सार्वजनिक हो जाने से हो रही फजीहत से बचने के लिए सरकार क्यूरेटिव पिटीशन के जरिए सुप्रीम कोर्ट को अंग्रेजी और व्याकरण समझा रही है। शर्मा ने कहा कि चूंकि फैसले की बुनियाद सरकार द्वारा दी गई झूठी जानकारी थी, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को न सिर्फ अपना फैसला वापस लेना चाहिए, बल्कि सरकार के खिलाफ अवमानना नोटिस भी जारी करना चाहिए।
शर्मा ने कहा कि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा है कि इस मामले में उसकी कुछ अपनी सीमा है। ऐसे में जाहिर तौर पर सौदे से संबंधित सभी पक्षों को सामने लाने के लिए जेपीसी की जांच जरूरी है। जेपीसी के अतिरिक्त अन्य कोई संस्था इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को तलब नहीं कर सकता।