जोरमथंगा को असम राइफल्स के क्वॉर्टर गार्ड में रखा, इसकी वजह ये थी कि वे असम राइफल्स को आइजोल शहर से बाहर ले जाने के लिए सक्रिय रूप से दबाव बना रहे थे। साल 1990 में हुई लालडेंगा की मृत्यु तक जोरमथंगा उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे, सशस्त्र संघर्ष के दिनों में और उसके बाद के वक्त में भी जोरमथंगा ने लालडेंगा के दूत की हैसियत से कई दक्षिण एशियाई देशों की यात्रा की, 25 साल के संघर्ष के बाद एमएनएफ ने 30 जून 1986 को ऐतिहासिक मिजो शांति समझौते पर दस्तखत किया। 1987 में मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया, इसी ऐतिहासिक मिजो समझौते के बाद राज्य की राजनीति में जोरमथंगा का पदार्पण हुआ।
एमएनएफ की कमान
साल 1987 के पहले मिजोरम विधानसभा चुनाव में जोरमथंगा अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र चंफई से पहली बार विधायक बने। बागी से मुख्यमंत्री बने लालडेंगा के मंत्रिमंडल में उन्हें वित्त और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।
साल 1990 में लालडेंगा के निधन के बाद जोरमथंगा के हाथ में एमएनएफ की कमान आ गई।
साल 2008 में कांग्रेस के एक नए उम्मीदवार टीटी ज़ोथनसांगा के हाथों चंफई सीट से हारने तक जोरमथंगा यहीं से विधायक चुने जाते रहे थे। ललथनहावला की अगुवाई वाली कांग्रेस से मुक़ाबले के लिए 1998 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जोरमथंगा ने मिजोरम पीपल्स कॉन्फ्रेंस से गठजोड़ कर लिया।
एमएनएफ और एमपीसी के सियासी गठजोड़ ने राज्य विधानसभा की 40 सीटों में से 33 जीत ली थीं।
इस जीत के बाद जोरमथंगा ने एक गठबंधन सरकार की कमान सँभाली। हालांकि गठबंधन सरकार की ये कोशिश नाकाम रही और 2003 के विधानसभा चुनाव में एमएनएफ ने अकेले ही जनता के बीच गई।
जोरमथंगा पर मिजोरम के लोगों ने भरोसा बरकरार रखा और लगातार दूसरी बार उन्हें सत्ता मिली। 10 साल तक सत्ता में बने रहने के बाद 2008 के चुनाव में जोरमथंगा को पुनर्जीवित हुई कांग्रेस ने सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर करारी शिकस्त दी।
साल 2008 में एमएनएफ 21 के आँकड़ें से सिमटकर राज्य विधानसभा की तीन सीटों तक रह गया। इन चुनावों में जोरमथंगा अपनी पारंपरिक चंफई सीट भी गँवा बैठे थे। विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने 2006 में जोरमथंगा के खिलाफ उनकी सरकार के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति बनाने का मामला शुरू किया।
उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, एफआईआर दर्ज हुई और मामला अदालतों तक भी पहुंचा। लेकिन इस सबके बावजूद 10 साल तक सत्ता से बेदखल रहने के बाद जोरमथंगा आइज़ोल के मैकडोनल्ड हिल स्थित मुख्यमंत्री आवास में वापस लौट आए हैं।
एमएनएफ फिलहाल बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है और जोरमथंगा ने ये साफ किया है कि राजग से बाहर निकलने का उनका कोई इरादा नहीं है। पांचवी बार मिजोरम विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए जोरमथंगा ने एक तरह से बीजेपी के 'कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर' अभियान को पूरा कर दिया।