कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने 'एक देश-एक चुनाव' पर कहा है कि मोदी सरकार ने अगर ईमानदारी दिखाई होती और देश की सभी पार्टियों को विश्वास में लिया होता तो यह संभव था। उन्होंने कहा कि फिलहाल संविधान संशोधन के बिना यह संभव नहीं है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने 'वन नेशन-वन पोल' पर बोलते हुए कहा कि यह संविधान संशोधन के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े लोकतंत्र में केंद्र सरकार को चाहिए था कि सभी राजनीतिक दलों को बुलाकर आम राय बनाकर भरोसे में लेते तो यह संभव था।
गहलोत का कहना है कि मोदी सरकार ईमानदार नहीं है और खर्चा बचाने का दिखावा करके पॉलिटिकल माइलेज लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि साथ चुनाव कराने का एक ही रास्ता बचता है कि मोदी इस देश पर कृपा करके इस्तीफा दें और संसद भंग करें और चुनावों का ऐलान कर दें। गहलोत के मुताबिक अगर मोदी ऐसा करते हैं, तो कांग्रेस लोकसभा और विधानसभा का चुनाव साथ लड़ने को पूरी तरह से तैयार है।
वहीं राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि कानून बड़ा स्पष्ट है कि विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है। किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में ही विधानसभा का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केवल संविधान संशोधन के जरिए ही ऐसा संभव है।
इससे पहले चुनाव आयोग ने भी लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के लिए भी वोटिंग कराने में असमर्थता जताई है। आयोग का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर वोटिंग के लिए चुनाव आयोग के पास पर्याप्त वीवीपैट मशीनें नहीं है। अगर ऐसी कोशिश होती है, तो इसके लिए नई वीवीपैट मशीनों का ऑर्डर देना होगा और इस बारे में एक या दो महीने में फैसला लेना होगा।
गौरतलब है कि सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लॉ कमीशन को पत्र लिखकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने की मांग की थी। शाह ने अपने पत्र में लिखा था कि इससे चुनाव पर बेतहाशा खर्च पर लगाम लगाने और देश के संघीय स्वरूप को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, एक साथ चुनाव कराना केवल परिकल्पना नहीं है, बल्कि एक सिद्धांत है जिसे लागू किया जा सकता है।