कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष थेन्नाला बालाकृष्ण पिल्लई का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 95 साल के थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उम्र संबंधी बीमारियों के चलते उनका एक निजी अस्पताल में निधन हुआ।
दो बार विधायक और तीन बार राज्यसभा सांसद रहे
थेन्नाला पिल्लई लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। वह दो बार विधायक और तीन बार राज्यसभा सांसद रहे। उन्होंने दो बार केपीसीसी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी। गांधीवादी सिद्धांतों में भरोसा रखने वाले, विनम्रता और सादगी से भरे हुए पिल्लई को पार्टी में 'थेन्नाला' नाम से जाना जाता था। उनके नेतृत्व में सहमति से फैसला लिए जाते थे और जब भी पार्टी में गुटबाजी हावी होती, तब उनकी संगठनात्मक क्षमता और शांत स्वभाव पार्टी में संतुलन लाने में मदद करता। वह सत्ता पाने की होड़ से दूर रहे और हमेशा एक गरिमापूर्ण राजनीतिक व व्यक्तिगत जीवन जीते रहे। उन्होंने कभी पद के लिए होड़ नहीं की और जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे ईमानदारी से निभाया।
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कोल्लम जिले में 1930 में हुआ था जन्म
पिल्लई का जन्म 11 मार्च 1930 को दक्षिण केरल के कोल्लम जिले के शूरनाड में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस वार्ड समिति के अध्यक्ष के रूप में की थी। इसके बाद वह ब्लॉक समिति और विधानसभा क्षेत्र समिति के अध्यक्ष बने और फिर कोल्लम जिला कांग्रेस समिति के प्रमुख बने। उन्होंने पांच विधानसभा चुनाव लड़े और दो बार (1977 और 1982) अदूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके अलावा, उन्होंने राज्यसभा में केरल का तीन बार प्रतिनिधित्व किया था।
पिल्लई के नेतृत्व में यूडीएफ को मिली थी ऐतिहासिक जीत
पिल्लई 2001 में उस समय केपीसीसी अध्यक्ष थे, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने विधानसभा चुनावों में 100 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। सियासत में उन्हें कई बार उनके योग्य पद नहीं दिए गए, लेकिन उन्होंने कभी भी पार्टी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और हर स्थिति को चुप्पी स्वीकार की। पार्टी के आंतरिक सत्ता-साझेदारी समझौते के चलते उन्हें अपना अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा, ताकि के मुरलीधरन (पूर्व मुख्यमंत्री करुणाकरन के बेटे) को वह पद मिल सके, जबकि 2001 में पार्टी को 100 सीटें जिताने का काम खुद पिल्लई ने किया था। इस फैसले को पार्टी नेतृत्व की तरफ से एहसान न मानने जैसा माना गया, लेकिन पिल्लई ने इस पर भी कभी कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने कोल्लम जिले में पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी थी।
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अंदरूनी कलह के समय पिल्लई पर भरोसा करता था कांग्रेस हाईकमान
जब भी पार्टी अंदरूनी कलह या गुटबाजी से जूझती थी, तब कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व पिल्लई पर भरोसा करता था। उन्होंने ऐसे समय में 'थेन्नाला समिति' नाम की एक टीम का नेतृत्व किया, जो पार्टी के भीतर विवाद सुलझाने का काम करती थी। उम्र संबंधी कारणों से उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था और पिछले कुछ वर्षों से एक शांत जीवन जी रहे थे।
निधन पर पार्टी नेताओं ने जताया दुख
उनके निधन पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने उन्हें 'सम्मानित और शालीन राजनेता' बताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पिल्लई कांग्रेस पार्टी के मूल्यों - प्रतिबद्धता, विनम्रता और ईमानदारी के प्रतीक थे। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर कहा, केरल के दिग्गज कांग्रेस नेता थेन्नाला बालकृष्ण पिल्लई के निधन से बहुत दुख हुआ। पार्टी ने एक दिग्गज और पितामह को खो दिया है।