बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने कारणों की गहराई से समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को उम्मीदवारों से मुलाकात की, जिसमें नेताओं ने खुलकर शिकायतें रखीं। कई उम्मीदवारों ने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा महिलाओं को 10,000 रुपये का ट्रांसफर, समय पर सीट बंटवारा तय न होना, आंतरिक कलह और चुनावी गड़बड़ियों ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया।
गठबंधन में देरी और आंतरिक विवाद
अररिया के विधायक अबिदुर रहमान ने कहा कि गठबंधन तय करने में देरी ने जनता में गलत संदेश दिया। 10–11 सीटों पर ‘फ्रेंडली कॉन्टेस्ट’ की वजह से भी नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि कई परिवारों में पति कांग्रेस को वोट दे रहा था और पत्नी 10,000 रुपये मिलने के कारण एनडीए के पक्ष में मतदान कर रही थी। रहमान ने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी में पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल की कमी रही।
लोकतंत्र पर सीधा हमला और ECI पर मिलीभगत का आरोप
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनावों में जो कुछ भी हुआ, वह 'लोकतंत्र पर सीधा हमला' है। उन्होंने कहा कि ये सभी मुद्दे 'चुनाव आयोग की देखरेख' में किए गए 'संगठित चुनावी कदाचार और आदर्श आचार संहिता के बेशर्म उल्लंघन' की ओर इशारा करते हैं। वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय रूप से मिलकर धांधली करने का गंभीर आरोप लगाया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस पार्टी इस 'चुराए गए जनादेश' को नई सामान्य स्थिति नहीं बनने देगी और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई निडरता और अथक रूप से जारी रहेगी।
अन्य उम्मीदवारों की राय
अन्य उम्मीदवार तौकीर आलम ने बताया कि नेताओं के साथ 10-10 के समूह में विस्तृत चर्चा हुई। पार्टी ने अपनी हार के हर पहलू की पड़ताल की। उम्मीदवारों ने कहा कि धर्म और जाति आधारित ध्रुवीकरण ने भी चुनाव को प्रभावित किया। सीमांचल क्षेत्र में एआईएमआईएम के मजबूत प्रदर्शन का प्रभाव कांग्रेस के वोटबैंक पर स्पष्ट रूप से देखा गया।