समान विचाराधारा वाले दल भी आएं कांग्रेस के साथ
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने वरिष्ठ नेताओं के एक सुझाव को काफी गंभीरता से लिया है। वह भी मजबूत विपक्ष को समझती हैं। 2003 में भी कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी तरह का प्रयोग किया था। पिछले कुछ सालों से इस परंपरा में थोड़ा विराम आ गया था। अब एक फिर सोनिया गांधी ने इसकी कमान संभाल ली है। वह पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड के मुख्यमंत्रियों के साथ 27 अगस्त को वर्चुअल मीटिंग करने वाली हैं।
वर्चुअल मीटिंग का विषय राज्यों का जीएसटी का बकाया, नीट और जेईई की परीक्षा होगा। इस संवाद को केंद्र को घेरने, कांग्रेस पार्टी का इकबाल बनाने तथा समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट रखने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि 14 सितंबर से संसद का मानसून सत्र प्रस्तावित है। यह 18 दिन तक चलेगा। इस लिहाज से भी राज्यों की मांग को लेकर कांग्रेस का नेतृत्व करना अहम माना जा रहा है।
कौन कांग्रेस के हित से इनकार कर रहा है?
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव कहती हैं कि अंतत: हम सभी कांग्रेसी हैं। कांग्रेस को मजबूत बनाना हमारी प्रतिबद्धता है। एक पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के हित से कौन इंकार कर रहा है। जिन नेताओं ने अपनी बात पत्र के माध्यम से रखी है, उन्होंने भी साफ किया है कि सवाल एक राष्ट्रीय पार्टी और देश हित का है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर सभी कांग्रेसजनों का मकसद भी यही है। सूत्र का कहना है कि विरोधी राजनीतिक दलों के लोग राहुल गांधी को बिना वजह भ्रम फैलाकर बदनाम कर रहे हैं।
सूत्र का कहना है कि मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि अभी कौन राहुल गांधी के अगला अध्यक्ष बनने की भविष्यवाणी कर रहा है। कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां सबकुछ लोकतंत्र की प्रक्रिया के अनुरुप होता है।
राहुल गांधी की टीम के सदस्य का कहना है कि लोगों को धैर्य रखना चाहिए। अहमद पटेल ने भी साफ किया है कि कोई गैर कांग्रेस परिवार का व्यक्ति भी कांग्रेस पार्टी का पूर्ण कालिक अध्यक्ष बन सकता है। पार्टी का अध्यक्ष चुनाव के जरिए आता है। कोई भी कांग्रेस का नेता चुनाव जीतकर हमारा अध्यक्ष हो सकता है। यह पहले भी कई बार हुआ है।