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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बढ़ाई सक्रियता, आजाद, मोइली और सिब्बल में कोई भी पराया नहीं

Wed, 26 Aug 2020 11:22 AM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • समान विचारधारा वाले दलों से बढ़ेगा संवाद, राज्य सरकारों से चर्चा भी होगी
  • विपक्षी एकता पर ध्यान देगी कांग्रेस
  • पार्टी के आंतरिक संगठन को ठीक करने की भी होगी पहल
  • जरूरी नहीं कि कांग्रेस अधिवेशन या चुनाव में राहुल गांधी को मिले अध्यक्ष की ताजपोशी
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सोनिया-राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी की सर्वमान्य नेता हैं। उन्हें पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में से किसी को भी इसमें आपत्ति नहीं है। अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार बढ़ने तथा सीडब्ल्यूसी सांगठनिक ढांचे को मजबूत बनाने का अधिकार मिलने के बाद उन्होंने सक्रियता काफी बढ़ा दी है।

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खुद सोनिया और राहुल का मानना है कि गुलाम नबी आजाद संजीदा नेता हैं। उनका नाराज होना ठीक नहीं है। लिहाजा मनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि कपिल सिब्बल, वीरप्पा मोइली या शशि थरूर हों, कोई गैर नहीं। सब मिलकर काम करेंगे।

इसे टीम सोनिया ने इस पर अमल भी शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेता अहमद पटेल काफी सक्रिय हो गए हैं। अहमद पटेल की खासियत है कि वह लोगों से रिश्ते बहुत मुश्किल से खराब करते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, एके एंटनी समेत सभी चाहते हैं कि पार्टी को लेकर मीडिया में चल रही भ्रामक स्थिति यथाशीघ्र बंद होनी चाहिए।
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मंगलवार को अपने नेताओं को मनाने के लिए खुद सोनिया और राहुल ने पहल की। दोनों ने गुलाम नबी आजाद को फोन किया। हालांकि फोन पर क्या बात हुई, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन उद्देश्य गिले-शिकवे दूर करने का ही रहा होगा।

समान विचाराधारा वाले दल भी आएं कांग्रेस के साथ

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने वरिष्ठ नेताओं के एक सुझाव को काफी गंभीरता से लिया है। वह भी मजबूत विपक्ष को समझती हैं। 2003 में भी कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी तरह का प्रयोग किया था। पिछले कुछ सालों से इस परंपरा में थोड़ा विराम आ गया था। अब एक फिर सोनिया गांधी ने इसकी कमान संभाल ली है। वह पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड के मुख्यमंत्रियों के साथ 27 अगस्त को वर्चुअल मीटिंग करने वाली हैं।

वर्चुअल मीटिंग का विषय राज्यों का जीएसटी का बकाया, नीट और जेईई की परीक्षा होगा। इस संवाद को केंद्र को घेरने, कांग्रेस पार्टी का इकबाल बनाने तथा समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट रखने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि 14 सितंबर से संसद का मानसून सत्र प्रस्तावित है। यह 18 दिन तक चलेगा। इस लिहाज से भी राज्यों की मांग को लेकर कांग्रेस का नेतृत्व करना अहम माना जा रहा है।
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कौन कांग्रेस के हित से इनकार कर रहा है?

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव कहती हैं कि अंतत: हम सभी कांग्रेसी हैं। कांग्रेस को मजबूत बनाना हमारी प्रतिबद्धता है। एक पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के हित से कौन इंकार कर रहा है। जिन नेताओं ने अपनी बात पत्र के माध्यम से रखी है, उन्होंने भी साफ किया है कि सवाल एक राष्ट्रीय पार्टी और देश हित का है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर सभी कांग्रेसजनों का मकसद भी यही है। सूत्र का कहना है कि विरोधी राजनीतिक दलों के लोग राहुल गांधी को बिना वजह भ्रम फैलाकर बदनाम कर रहे हैं।

सूत्र का कहना है कि मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि अभी कौन राहुल गांधी के अगला अध्यक्ष बनने की भविष्यवाणी कर रहा है। कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां सबकुछ लोकतंत्र की प्रक्रिया के अनुरुप होता है।

राहुल गांधी की टीम के सदस्य का कहना है कि लोगों को धैर्य रखना चाहिए। अहमद पटेल ने भी साफ किया है कि कोई गैर कांग्रेस परिवार का व्यक्ति भी कांग्रेस पार्टी का पूर्ण कालिक अध्यक्ष बन सकता है। पार्टी का अध्यक्ष चुनाव के जरिए आता है। कोई भी कांग्रेस का नेता चुनाव जीतकर हमारा अध्यक्ष हो सकता है। यह पहले भी कई बार हुआ है।
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