रिकॉर्ड 22वीं बार बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.43 रुपये प्रति लीटर और डीजल 80.53 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इस महीने पेट्रोल की कीमतों में न्यूनतम 9.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 10.45 रुपये प्रति लीटर का उछाल आया है।
डीजल-पेट्रोल कीमतों में वृद्धि के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को मोर्चा संभाला। पार्टी कार्यकर्ता सोमवार को पूरे देश में सड़कों पर उतरे।
आर्थिक विशेषज्ञ और भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि मनमोहन सिंह सरकार में पेट्रो उत्पादों की कीमतें अप्रत्यक्ष तरीके से बढ़ाई जाती थीं।
जनता से कम मूल्य लेने के पीछे तेल कंपनियों को पेट्रो बांड दे दिए जाते थे। बाद में उसे जनता की ही कमाई से भरा जाता था। मनमोहन सिंह सरकार में दिए पेट्रो बांड्स को इस समय भी सरकार चुका रही है।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में टैक्स की विभिन्न दरें घटा दी गई हैं। अनेक खाद्य पदार्थों की कीमतें शून्य टैक्स पर ला दी गई हैं, कई महत्वपूर्ण चीजों पर टैक्स घटाकर पांच और 12 फीसदी कर दिया गया है।
प्रत्यक्ष कर में भी आम लोगों को काफी राहत दी गई है। 2.50 लाख रुपये की आय तक कोई टैक्स नहीं लिया जा रहा है, तो पांच लाख रुपये तक की आय पर नाम मात्र का टैक्स लिया जाता है, जिसे विभिन्न योजनाओं में निवेश दिखाकर उसे भी शून्य किया जा सकता है।
इसी प्रकार औद्योगिक कम्पनियों को भी व्यापार में बढ़ोतरी देने के लिए कई तरह के करों में छूट दी गई है। उन्हें कई प्रकार से बेहद कम ब्याज पर धन उपलब्ध कराया जा रहा है।
पेट्रोल कीमतों से हो रही आय का 42 फीसदी हिस्सा राज्यों को भी दिया जाता है। जबकि राज्य इन्हीं कीमतों पर अपना वैट अलग से लगाते हैं। दिल्ली में डीजल की कीमतें पेट्रोल से ज्यादा होने के पीछे यही कारण है क्योंकि अरविंद केजरीवाल सरकार ने वैट की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी।
अगर राज्य सरकारें अपनी जनता को इस मूल्य वृद्धि से बचाना चाहती हैं तो वे इन दरों में कटौती कर सकती हैं।
वर्तमान समय में सरकार की आय बेहद कम हो गई है, जबकि इसी बीच उसे राज्यों को सहयोग करना है, कल्याणकारी योजनायें चलानी हैं और लाखों कर्मचारियों-सैनिकों को वेतन भी देना है।