मध्यप्रदेश के चुनावी नतीजे घोषित करने में करीब 24 घंटे लग गए। मंगलवार सुबह शुरू हुई मतगणना बुधवार सुबह आठे बजे खत्म हो सकी है। इसकी वजह कांग्रेस पार्टी द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष रखे गए कुछ सुझाव रहे हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ और राज्य में कांग्रेस के चुनावी अभियान के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मिल सभी राउंड के मतों की गिनती हो जाने पर एक सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की थी। इसके अलावा वोटों की गिनती का पहला राउंड जब तक घोषित नहीं हो जाता और हर पार्टी के उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक गिनती का दूसरा राउंड शुरू नहीं किया जाए, यह मांग भी प्रमुख तौर से चुनाव आयोग के समक्ष रखी गई थी।
पहले माना जा रहा था कि दूसरे राज्यों की भांति मध्यप्रदेश के चुनावी नतीजे शाम तक आ जाएंगे।कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसी के मद्देनज़र अपनी प्रेसवार्ता का समय शाम पांच बजे रखा था। तीन घंटे बाद भी जब चुनाव आयोग की ओर से फाइनल नतीजें घोषित नहीं किए गए तो राहुल गांधी को मतगणना के रुझान पर अपनी जीत का ऐलान करना पड़ा।
11 दिसंबर की सुबह 230 सीटों पर शुरु हुई वोटों की गिनती 12 दिसंबर को सुबह आठ बजे तक चलती रही। खास बात है कि इससे पहले हुए चुनावों में जब ईवीएम से गिनती होती थी तो दोपहर बाद तक सभी सीटों के परिणाम आ जाते थे। इस बार कांग्रेस पार्टी ने गिनती से पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष कुछ मांगें रख दी थी।
आयोग ने भी कांग्रेस पार्टी की उन मांगों को मान लिया। इनमें पहली मांग यह थी कि सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थित मतगणना केंद्रों पर ईवीएम के वोटों का मिलान 'वोटर-वेरिफ़ाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल' वीवीपैट से कराया जाए। हालांकि आयोग ने सभी 306 मतगणना केंद्रों पर मौजूद किसी एक ईवीएम के वोटों का मिलान वीवीपैट से कराया है।इसके चलते चुनावों के नतीजें घोषित करने में देरी हुई है।
मध्यप्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी वीएल कांता राव का कहना है कि प्रत्येक चरण की गिनती के बाद ईवीएम का वीपीपैट से मतों का मिलान करना पड़ा।अगर किसी मतगणना केंद्र पर उम्मीदवार ने गिनती को लेकर कोई शंका जाहिर की है तो वहां वीवीपैट से उन्हें संतुष्ट किया गया है।
इस वजह से भी हुई मतगणना में देरी
चुनाव अधिकारी के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी की मांग थी कि सभी राउंड के मतों की गिनती पूरी हो जाने के बाद संबंधित प्रत्याशियों को आयोग की ओर से एक सर्टिफिकेट दिया जाए।आयोग ने सभी उम्मीदवारों को यह सर्टिफिकेट दिया है।कई सीटों पर, जहां हार-जीत का अंतर बहुत कम था, वहां प्रत्याशी ने दोबारा से मतगणना कराने की मांग रख दी।आयोग ने ऐसी जगहों पर दोबारा से वोटों की गिनती कराकर सर्टिफिकेट जारी किया है।
कांग्रेस पार्टी ने रखी थी ये मांगे
कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर यह मांग रखी थी कि जहां पर ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी, कहीं पावर ऑफ तो कहीं ईवीएम मशीनें होटल में पाए जाने के मामले सामने आ आए हैं, वहां सभी अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटाया जाए।उनके नेतृत्व में गिनती नहीं होनी चाहिए।
दूसरा, वोटों की गिनती का पहला राउंड जब तक घोषित नहीं हो जाता और हर पार्टी के उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक गिनती का दूसरा राउंड शुरु नहीं किया जाए। पहले राउंड की गिनती के बाद ही रिजल्ट की घोषणा कीजिए।इसके बाद ही दूसरे राउंड की गिनती शुरु करें। गिनती के बाद हर प्रत्याशी को सर्टिफ़िकेट जारी किया जाए।
कपिल सिब्बल ने आयोग को चुनावी गड़बड़ियों के अनेक उदाहरण भी दिए थे कि किस तरह से प्राईवेट स्कूल बस के ज़रिए, जिसका कोई नंबर नहीं था, ईवीएम ट्रांस्पोर्ट हो रही हैं।इसका कोई ईवीएम ट्रैकिंग सिस्टम भी नहीं है।कौन सी ईवीएम कहाँ जाती हैं, ये किसी को मालूम नहीं है।मतदान के दौरान जिन मशीनों का इस्तेमाल नहीं हुआ, उन्हें और कहीं रखा जाना चाहिए।उनकी मतदान गणना केन्द्र में कोई जरुरत नहीं है, लेकिन उन्हें इस्तेमाल हो चुकी ईवीएम के साथ ही रखा जा रहा है।इससे गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है।आयोग ने पार्टी के इन सुझावों पर काम करते हुए चुनावी नतीजा जारी किया है।