फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पेगासस जासूसी: स्पाईवेयर की 'पूंछ' तक पहुंच गई कांग्रेस, प्रशांत भूषण ने कही 'साइबर हैकिंग' की बात

सार

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी शुक्रवार को दस्तावेजों के दो पन्ने ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, 2016-17 में एनएसए का बजट 33.17 करोड़ रुपये था। अगले साल वह बजट 333 करोड़ रुपये हो गया। ये वही साल था, जब एनएसओ को कुछ लोगों की साइबर हैकिंग करने के लिए सौ करोड़ रुपये दिए गए थे...
विज्ञापन
एनएसओ कंपनी - फोटो : for reference only
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

'पेगासस जासूसी' मामले की तह तक पहुंचने के लिए कांग्रेस पार्टी ने पूरा जोर लगा दिया है। पार्टी को भरोसा है कि बहुत जल्द 'पेगासस' मामले का खुलासा हो जाएगा। ये स्पाईवेयर भारत सरकार के पास है या नहीं, अगर है तो कहां है, किसने इसका इस्तेमाल किया है, देश में नहीं है तो क्या किसी दूसरे मुल्क की एजेंसी से जासूसी कराई है, कांग्रेस इन सवालों का जवाब तलाश रही है। दरअसल, 'नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट' के बजट से संबंधित एक दस्तावेज कांग्रेस के हाथ लगा है। इसके आधार पर पार्टी को लगता है कि 'पेगासस जासूसी प्रकरण' की पूंछ उसके हाथ में आ गई है।

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी शुक्रवार को दस्तावेजों के दो पन्ने ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, 2016-17 में एनएसए का बजट 33.17 करोड़ रुपये था। अगले साल वह बजट 333 करोड़ रुपये हो गया। ये वही साल था, जब एनएसओ को कुछ लोगों की साइबर हैकिंग करने के लिए सौ करोड़ रुपये दिए गए थे। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट में यह भी लिखा कि बजट बढ़ाने के लिए नए हेड का नाम 'साइबर सिक्योरिटी आरएंडडी' रखा गया था।

विज्ञापन

कांग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को यह खुलासा किया था। अभी तक विपक्षी दलों की तरफ से केंद्र सरकार के सामने यह सवाल रखा गया था कि देश में पेगासस सॉफ्टवेयर है या नहीं। सत्ता पक्ष की तरफ से इस बाबत गोलमोल जवाब दिया गया। बतौर खेड़ा, अभी तक सरकार ना और हां नहीं बोल रही है। कांग्रेस पार्टी के पास अहम दस्तावेज मौजूद हैं। नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का 'नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट' कॉर्डिनेशन का काम करता है। इसका भी अपना एक बजट होता है। 2017-18 में यहां एक नया हेड डाल दिया गया। इसका नाम रखा गया, 'साइबर सिक्योरिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट'। नए हेड के लिए अचानक 300 प्रतिशत बजट बढ़ाना, ये शक पैदा करता है।

प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट में लिखा, 300 फीसदी बजट बढ़ाने के पीछे क्या वजह है। क्या इसी बजट से पेगासस के जरिए पत्रकारों, विपक्ष, जज, चुनाव आयुक्त और एक्टिविस्ट की साइबर हैकिंग कराने के लिए एनएसओ को सौ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। पवन खेड़ा के मुताबिक, इसमें हैरानी वाली बात यह है कि साइबर सिक्योरिटी रिसर्च का एक हेड पहले से ही मौजूद है। उसका अलग बजट होता है। अब सवाल यह उठता है कि नया हेड क्यों डाला गया। महज 33 करोड़ में सेक्रेटेरिएट सर्विस का काम जो विभाग देख रहा है था, उसका बजट एकाएक तीन सौ फीसदी बढ़ाना, क्या यह शक पैदा करने के लिए काफी नहीं है। देश को आज भले ही भाजपा यह नहीं बता रही है कि पेगासस का इस्तेमाल किसने किया है। किस एजेंसी के पास ये विदेशी सॉफ्टवेयर है। लेकिन इस मामले का खुलासा जल्द होगा।  

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें