कांग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को यह खुलासा किया था। अभी तक विपक्षी दलों की तरफ से केंद्र सरकार के सामने यह सवाल रखा गया था कि देश में पेगासस सॉफ्टवेयर है या नहीं। सत्ता पक्ष की तरफ से इस बाबत गोलमोल जवाब दिया गया। बतौर खेड़ा, अभी तक सरकार ना और हां नहीं बोल रही है। कांग्रेस पार्टी के पास अहम दस्तावेज मौजूद हैं। नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का 'नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट' कॉर्डिनेशन का काम करता है। इसका भी अपना एक बजट होता है। 2017-18 में यहां एक नया हेड डाल दिया गया। इसका नाम रखा गया, 'साइबर सिक्योरिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट'। नए हेड के लिए अचानक 300 प्रतिशत बजट बढ़ाना, ये शक पैदा करता है।
प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट में लिखा, 300 फीसदी बजट बढ़ाने के पीछे क्या वजह है। क्या इसी बजट से पेगासस के जरिए पत्रकारों, विपक्ष, जज, चुनाव आयुक्त और एक्टिविस्ट की साइबर हैकिंग कराने के लिए एनएसओ को सौ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। पवन खेड़ा के मुताबिक, इसमें हैरानी वाली बात यह है कि साइबर सिक्योरिटी रिसर्च का एक हेड पहले से ही मौजूद है। उसका अलग बजट होता है। अब सवाल यह उठता है कि नया हेड क्यों डाला गया। महज 33 करोड़ में सेक्रेटेरिएट सर्विस का काम जो विभाग देख रहा है था, उसका बजट एकाएक तीन सौ फीसदी बढ़ाना, क्या यह शक पैदा करने के लिए काफी नहीं है। देश को आज भले ही भाजपा यह नहीं बता रही है कि पेगासस का इस्तेमाल किसने किया है। किस एजेंसी के पास ये विदेशी सॉफ्टवेयर है। लेकिन इस मामले का खुलासा जल्द होगा।