देश में पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने जनता की कमर तोड़ दी है। महंगाई को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए यह बात कही है। कांग्रेस का कहना है कि पिछले आठ साल में केंद्र सरकार ने बार-बार पेट्रोल और डीजल पर करों में वृद्धि कर जनता से 26 लाख करोड़ रुपये वसूल लिए हैं। पेट्रोल, डीजल व गैस सिलेंडर की कीमतों को कांग्रेस-यूपीए के कार्यकाल वाली दरों पर लाया जाए। लोगों से यह बेशर्म लूट बंद होनी चाहिए। पांच राज्यों में जब तक चुनाव चल रहा था, तो महंगाई पर अल्पविराम लगा था। भाजपाई जीत के साथ ही मोदी जी द्वारा लाए 'महंगे दिन' वापस आ गए हैं। महंगाई ने जनता का जीना हराम कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने कहा, भाजपा ने महंगाई के साथ पक्का गठजोड़ कर लिया है।
मंगलवार को महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी द्वारा जारी बयान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अमित शाह ने कहा था कि चुनाव जिताओ और होली पर मुफ़्त गैस सिलेंडर पाओ। अब उन्होंने सिलेंडर तो फ्री में दिया नहीं, महंगा जरूर कर दिया है। भाजपा अपनी जीत के साथ तीन चीजें साथ लाती है, अहंकार, निरंकुशता और महंगे दिन। पार्टी ने कहा, मई 2014 में जब मोदी ने सत्ता संभाली तो पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क केवल 9.20 रुपये प्रति लीटर था। डीजल पर यह शुल्क 3.46 रुपये प्रति लीटर था। भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोल पर 18.70 प्रति लीटर और डीजल पर 18.34 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी, यूपीए की तुलना में क्रमशः 203 और 531 फीसदी ज्यादा है।
वर्ष 2014-15 से वर्ष 2021-22 तक आठ वर्षों की अवधि के बीच, केंद्र की भाजपा सरकार ने बार-बार पेट्रोल और डीजल पर करों में वृद्धि की है। इसके जरिए लोगों से आठ साल में 26 लाख करोड़ रुपये वसूले गए हैं। लॉकडाउन के बाद से, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी की गई। उत्पाद शुल्क से जबरन वसूली हुई। मुनाफाखोरी की सीमा सभी प्रकार के शोषण को पार कर गई है। 22 मार्च 2020 को, दो साल पहले आज के ही दिन, पेट्रोल और डीजल की दरें क्रमशः 69.59 रुपये और 62.29 रुपये थीं, जिसे बढ़ाकर क्रमश: 96.21 रुपये प्रति लीटर और 87.47 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
कांग्रेस पार्टी ने कहा, 26 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली थी, तब भारत की तेल कंपनियों को कच्चा तेल 108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल मिल रहा था। आज भी कच्चा तेल का दाम 108.25 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल है। उस समय पेट्रोल व डीजल क्रमशः 71.41 और 55.49 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध था, जो आज क्रमशः 96.21 व 87.47 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है।
एलपीजी की दरें सऊदी अरामको की एलपीजी कीमतों के आधार पर तय की जाती हैं। वर्तमान में यह दर 769.11 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन है, जो कि डॉलर-रुपये की विनिमय दर 75.89 रुपये के अनुसार 58,367.75 प्रति मीट्रिक टन, यानी एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमत 58.37 रुपये प्रति किलोग्राम है। एक घरेलू गैस सिलेंडर में 14.2 किग्रा गैस होती है, यदि इसका आधार मूल्य निकाला जाए तो यह 828.82 रुपये प्रति सिलेंडर बनती है। फिर इस कीमत पर, मोदी सरकार 5 फीसदी जीएसटी, बॉटलिंग शुल्क, एजेंसी कमीशन, परिवहन शुल्क लेती है। कंपनियों के अपने लाभ में वृद्धि करती है और इस देश के गरीब लोगों से प्रत्येक सिलेंडर के लिए 949-1100 रुपये की मोटी राशि वसूल की जा रही है। यूपीए सरकार में एलपीजी का अंतर्राष्ट्रीय मूल्य 2012-2013 और 2013-2014 में 885.2 और 880.5 यूएस डॉलर था। यूपीए सरकार महंगे भाव से एलपीजी को खरीदकर आम जनता को भारी सब्सिडी देकर केवल 399-414 रुपये प्रति सिलेंडर के भाव में देती थी।