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Amit Shah: 'बोडो समझौते का कांग्रेस ने मजाक उड़ाया, लेकिन इससे शांति आई', असम में बोले अमित शाह

Sun, 16 Mar 2025 02:52 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

शाह ने बोडो युवाओं से कहा कि अब उन्हें 2036 के ओलंपिक की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, जिसका आयोजन अहमदाबाद में होना प्रस्तावित है। शाह ने कहा कि बोडो समझौते के 82 प्रतिशत खंड लागू किए जा चुके हैं और अगले दो वर्षों में 100 प्रतिशत लागू कर दिए जाएंगे।
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अमित शाह - फोटो : X/Amit Shah
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने जब बोडो समझौते पर हस्ताक्षर किए तो कांग्रेस ने उसका मजाक उड़ाया था लेकिन इससे क्षेत्र में शांति स्थापित हुई और विकास को गति मिली। शाह ने असम के कोकराझार में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) के 57वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बोडोलैंड में स्थापित शांति का संदेश है। मुझे याद है कि 27 जनवरी 2020 को जब बीटीआर (बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र) शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे तो कांग्रेस पार्टी मेरा मजाक उड़ाती थी कि बोडोलैंड में कभी शांति नहीं होगी और यह समझौता मजाक बनकर रह जाएगा लेकिन असम सरकार और केंद्र इस समझौते की करीब 82 प्रतिशत शर्तों को लागू कर चुकी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अगले दो वर्षों में समझौते की 100 प्रतिशत शर्तों को लागू करेगी। इसके बाद बीटीआर क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनी रहेगी।

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बोडोलैंड क्षेत्र से अफस्पा कानून हटाया गया
गृह मंत्री ने कहा कि समझौते के प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल, 2022 को पूरे बोडोलैंड क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा अधिनियम) को हटा दिया गया है। आज दिल्ली के होटल में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत बोडोलैंड का कोकराझार का मशरूम सबके खाने का हिस्सा बन गया है, यह इसलिए हुआ क्योंकि यहां शांति है।
 
बोडोलैंड के युवा 2036 ओलंपिक की करें तैयारी
उन्होंने कहा कि बोडोलैंड ने डूरंड कप की मेजबानी की है। 2036 में अहमदाबाद में ओलंपिक होने जा रहा है। बोडोलैंड के युवा खिलाड़ी ओलंपिक में भाग लेने की तैयारी करें। एक दर्जन से अधिक उत्पाद जीआई टैग की सूची में शामिल हैं। इससे बीटीआर में औद्योगिक माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब बोडोलैंड में उन्माद, उत्पात और अलगाववाद की बात होती थी लेकिन अब शिक्षा, विकास और उद्योग की बात होती है।
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बोडोलैंड के विकास के लिए 1500 करोड़ दिए
उन्होंने कहा कि बोडोलैंड के विकास के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और असम सरकार ने 1500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि इस क्षेत्र की आबादी मात्र 35 लाख है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय बोडो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। सोनितपुर और बिश्वनाथ जिले को बीटीआर क्षेत्र में शामिल कर क्षेत्र का विस्तार किया गया।
 
एनडीएफबी के सदस्यों के पुनर्वास पर 287 करोड़ खर्च
शाह ने कहा कि सैकड़ों युवाओं को समाज की मुख्य धारा में लाया गया है। कई सारे हथियार सरेंडर हुए हैं। पिछले तीन साल में असम में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के 4,881 सदस्यों के पुनर्वास पर 287 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका 90 प्रतिशत हिस्सा मोदी सरकार ने दिया है। उन्होंने कहा कि रोजगार और कौशल विकास के लिए भी ढेर सारे काम किए गए।
 
जहां गोलियां चलती थीं, वहां अब हाथों में तिरंगा लहरा रहा
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने असम में कुल नौ उग्रवादी संगठनों से समझौते कर 10,000 से ज्यादा युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया है। एक जमाने में जहां गोलियां चलती थीं, वहां आज बोडो युवा हाथों में तिरंगा लहरा रहे हैं। यह दृश्य पूरे देश के लिए एक संदेश है। उन्होंने कहा कि जब बोडो समझौता हुआ, तब न केवल बोडोलैंड और असम, बल्कि पूरा देश खुश था। जिस तरह बोडोलैंड के लोग देश से प्यार करते हैं, उसी तरह पूरा देश बोडोलैंड और यहां के लोगों से प्यार करता है।
 
पीएम मोदी ने पूर्वाेत्तर को उग्रवाद, आंदोलन से मुक्त कराया
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे पूर्वोत्तर को उग्रवाद, आंदोलन, बंद और हिंसा जैसी समस्याओं से मुक्त कराकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने का काम किया है। पीएम मोदी और हिमंत बिस्व सरमा की अगुवाई में हाल में इनवेस्टमेंट समिट हुई, जिससे पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश असम में आ रहा है। उन्होंने बोडो युवाओं से पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने और शांति प्रक्रिया को स्थापित करने में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड में ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है जिससे बोडो युवा विश्व के युवाओं से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
 
दिल्ली में उपेंद्रनाथ ब्रह्मा के नाम पर होगी एक सड़क
पूर्व एबीएसयू अध्यक्ष उपेंद्रनाथ ब्रह्मा को श्रद्धांजलि देते हुए गृह मंत्री ने घोषणा की कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। यह कार्यक्रम 1 अप्रैल को दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री और अन्य राज्य नेताओं की मौजूदगी में होगा। शाह ने बीटीआर शांति समझौते के लिए एबीएसयू को श्रेय देते हुए कहा कि अगर एबीएसयू ने प्रमुख भूमिका नहीं निभाई होती तो समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए होते।

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जनवरी 2020 में हुआ था बोडो समझौता
गौरतलब है कि केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो समुदाय के बीच जनवरी 2020 में बोडो समझौता हुआ था। उस समझौते का उद्देश्य आंतरिक संघर्ष पर विराम लगाना था। बोडो जनजाति के लोग दशकों से ब्रह्मपुत्र नदी के तट के ऊपरी क्षेत्र को एक अलग बोडोलैंड राज्य बनाने की मांग कर रहे थे। बोडो समुदाय का मानना था कि अन्य समुदायों की मौजूदगी से इस समुदाय की पहचान, संस्कृति को खतरा है। बोडो समुदाय और इसके कई संगठनों ने कई बार अपनी बात को मनवाने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाया। हालांकि जनवरी 2020 में हुए बोडो समझौते से इस हिंसा पर रोक लगी। 
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शनिवार को भी अमित शाह ने असम में लचित बरफुकन पुलिस अकादमी के उद्घाटन के अवसर पर कांग्रेस को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने असम में शांति कायम नहीं होने दी, लेकिन पीएम मोदी ने इसे बहाल किया और पूर्वोत्तर का विकास किया। अमित शाह ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 10 हजार से अधिक युवा हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। 

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