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Gujarat Election: 'शीत युद्ध' जैसे चुनावी प्रचार में नहीं फंसी कांग्रेस, जीत हासिल करने के लिए बनाया यह प्लान

सार

देश की राजनीति में इस वक्त एक नया प्रयोग हो रहा है। राहुल गांधी, 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रहे हैं। लंबे वक्त के बाद कांग्रेस पार्टी को मल्लिकार्जुन खड़गे के तौर पर गैर-गांधी अध्यक्ष मिला है। 2019 का लोकसभा चुनाव 'मोदी बनाम राहुल' हुआ था। उसके बाद हुए अधिकांश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वंशवाद को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर खूब निशाना साधा। अब हिमाचल प्रदेश में चुनावी गतिविधियां जोरों पर हैं, मगर राहुल गांधी अपनी यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं
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कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने गुजरात चुनाव को लेकर सीईसी की बैठक भी की। इस बार कांग्रेस पार्टी, बिल्कुल नई रणनीति पर काम कर रही है। हिमाचल प्रदेश में चुनावों की घोषणा हो गई है और गुजरात में जल्द हो सकती है। राहुल गांधी, दोनों राज्यों से दूर 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रहे हैं। इस बार कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को चुनावी प्रचार में शीत युद्ध का मौका नहीं दिया। इससे पहले के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा 'मोदी बनाम राहुल' कर शीतयुद्ध की तरह कांग्रेस पार्टी पर बमबारी करती रही है। इस बार न तो 'मोदी बनाम राहुल' है और न ही वंशवाद का मुद्दा हावी है। कांग्रेस पार्टी को गैर गांधी अध्यक्ष मिल चुका है। कांग्रेस पार्टी की अंदरुनी राजनीति को समझने वाले लेखक और स्तंभकार रशीद किदवई कहते हैं,  अब 'शीत युद्ध' जैसे चुनावी प्रचार में कांग्रेस पार्टी नहीं फंस रही। पार्टी ने 'हाई पिच' पर न खेल कर दमदार खेल दिखाने यानी मैच जीतने का असरदार प्लान तैयार किया है।  

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कांग्रेस में राज्यों की पॉलिटिक्स से दूर रहे ज्यादातर पीएम... 
बतौर रशीद किदवई, आज की पीढ़ी को लगता है कि जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी, राज्यों के विधानसभा चुनाव में अति सक्रियता दिखाते हैं, कुछ वैसे ही उनसे पहले के पीएम रहे नेता भी राज्यों के चुनाव में भाग लेते थे। ऐसा नहीं है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, राज्यों में सक्रियता नहीं दिखाते थे। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया था। इंदिरा गांधी की कुछ राज्यों में सक्रियता देखी गई। इसके बाद पीवी नरसिंह राव ने जब पीएम की कुर्सी संभाली तो उन्होंने भी अपनी पार्टी की सरकार वाले प्रदेशों की राजनीति में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया। राजीव गांधी भी प्रदेशों में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। अटल बिहारी वाजपेयी भी कम ही राज्यों में गए थे। राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी से आए कई पीएम तो विदेश दौरों पर ही रहते थे। अब पीएम मोदी का काम करने का अलग अंदाज है। वे छोटे से छोटे और बड़े से बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी प्रचार करते हैं। 

देश की राजनीति में हो रहा है एक नया 'प्रयोग' ... 
देश की राजनीति में इस वक्त एक नया प्रयोग हो रहा है। राहुल गांधी, 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रहे हैं। लंबे वक्त के बाद कांग्रेस पार्टी को मल्लिकार्जुन खड़गे के तौर पर गैर-गांधी अध्यक्ष मिला है। 2019 का लोकसभा चुनाव 'मोदी बनाम राहुल' हुआ था। उसके बाद हुए अधिकांश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वंशवाद को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर खूब निशाना साधा। अब हिमाचल प्रदेश में चुनावी गतिविधियां जोरों पर हैं, मगर राहुल गांधी अपनी यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। गुजरात में भी जल्द ही विधानसभा चुनावों की घोषणा हो सकती है। वहां पर 'भाजपा' और 'आप' नेताओं के नियमित दौरे हो रहे हैं। राहुल गांधी, वहां पर भी नहीं जा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने हिमाचल प्रदेश में अभी तक एक जनसभा को संबोधित किया है। रशीद किदवई कहते हैं, ये अनूठा प्रयोग हो रहा है। राहुल गांधी, न तो गुजरात और न ही हिमाचल प्रदेश में जा रहे हैं, इसके पीछे एक बड़ी वजह है। 
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टाइटेनिक स्तर की फाइट में प्रवेश कर रही है कांग्रेस ...  
2024 से पहले करीब दस राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार की छवि धूमिल करने का हर संभव प्रयास किया है। इन सबके बीच ही नई रणनीति बनी है। कांग्रेस पार्टी को गैर गांधी अध्यक्ष मिल गया। 'भारत जोड़ो यात्रा' चल रही है। पार्टी अध्यक्ष खरगे की जिम्मेदारी बढ़ी है तो दो राज्यों के चुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी, एक टाइटेनिक स्तर की फाइट में प्रवेश कर रही है। तैयारी युद्ध जैसी है, लेकिन उसका प्रचार नहीं हो रहा। कांग्रेस पार्टी ने अभी जो रणनीति बनाई है, उसमें 'मोदी बनाम राहुल' के लिए कोई जगह नहीं है। राज्य का चुनाव, राज्य के स्तर पर और लोकल मुद्दों पर लड़ा जाएगा। उसमें न तो पाकिस्तान होगा और न ही कश्मीर। बतौर रशीद किदवई, कांग्रेस पार्टी दोनों राज्यों में निचले स्तर पर काम कर रही है। कुछ हद तक आम आदमी पार्टी भी इसी राह पर आगे बढ़ चली है। हालांकि आप के प्रचार में केजरीवाल, पीएम मोदी को निशाने पर रखते हैं। 

कांग्रेस पार्टी ने तोड़ दिया ये माइंड सेट ... 
कांग्रेस ने अपने अतीत से बहुत कुछ सीखा है। अब वह उन गलतियों को दोबारा नहीं दोहराना चाहती। दिल्ली जैसे मेट्रो सिटी या दक्षिण व उत्तर भारत में बैठे लोगों को यह महसूस हो रहा होगा कि कांग्रेस पार्टी, दोनों प्रदेशों में चुनाव लड़ती हुई नहीं दिखती। वजह, लोगों का भी वही माइंड सेट 'मोदी बनाम राहुल' बन गया था। अब वे उसी नजर से देखते हैं। पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है। गुजरात की 182 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने कम से कम सौ सीटों का प्लान तैयार किया है। पिछले चुनाव में भाजपा को 99 और कांग्रेस को 77 सीटें मिली थीं। 2012 में भाजपा को 119 सीटें, जबकि कांग्रेस पार्टी के हाथ 57 सीट आई थी। इस बार कांग्रेस और आप में एक अघोषित संबंध नजर आ रहा है। कांग्रेस पार्टी, ग्रामीण गुजरात पर फोकस कर रही है तो वहीं 'आप' शहरों में पांव जमाने का प्रयास कर रही है। गुजरात और हिमाचल में कांग्रेस ने अब भाजपा से गांधी परिवार और वंशवाद का मुद्दा छीन लिया है। भाजपा, अब इन मुद्दों को लेकर वोटरों को गुमराह नहीं कर सकती। 

यहां भाजपा को रोक दिया तो हैरान करेंगे 2024 के नतीजे...  
कांग्रेस और आप, ये दोनों पार्टी जानती हैं कि वे गुजरात में अगर भाजपा को रोकने में सफल हो गए तो 2024 के नतीजे हैरान करने वाले होंगे। भाजपा को दो तरफा घेरा जा रहा है। आप ने शिक्षा व स्वास्थ्य के मॉडल पर भाजपा सरकार को घेरा है तो कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्र के मुद्दे उठाए हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का असर, दोनों राज्यों में दिख रहा है। गुजरात में अगर भाजपा को 'सौ' सीटों से पहले रोक पाने में अगर विपक्षी दल सफल हो जाते हैं तो यह उनकी जीत मानी जाएगी। इसके दूरगामी नतीजे देखने को मिलेंगे। कांग्रेस इस बार हाई पिच पर नहीं खेल रही है। भले ही कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अपनी राह से विचलित नहीं हो रही है। हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकुर, अब दूसरे पाले में हैं तो भी कांग्रेस पार्टी अपनी धुन में आगे कदम बढ़ा रही है। जमीनी स्तर पर ऐसी 75 सीटों की सूची बनाई गई है, जहां कांग्रेस आसानी से जीत सकती है। बाकी की 25 30 सीटों पर दूसरे दलों को कांटे के मुकाबले में फंसा सकती है। 

भाजपा को अखर रहा है राहुल गांधी का चुनाव से दूर रहना ... 
भाजपा को राहुल गांधी का चुनाव से दूर रहना, अखर रहा है। अब यह पार्टी चुनाव को शीत युद्ध की तरह नहीं ले पाएगी। चुनाव प्रचार केवल दो खेमों में विभाजित नहीं होगा। राहुल गांधी को चुनाव से दूर रखकर कांग्रेस ने भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है। कांग्रेस का लंबा इतिहास है तो कोई भी विपक्षी किसी न किसी काल खंड से कुछ भी बात उठाकर हमला कर सकता है। भाजपा ने अभी तक इसी का फायदा उठाया है। कभी नेहरू तो कभी इंदिरा गांधी का नाम लेकर कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है। 'आप' नई पार्टी है। उसके खिलाफ शराब घोटाले के अलावा और क्या है। उसमें भी अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। ऐसे में कांग्रेस और आप, दोनों को अपने तरीके से गुजरात में फायदा नजर आ रहा है। गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा 25 फीसदी टिकट नए चेहरों को देने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि उम्मीदवार की जीत पर विचार होगा। दोहराने की कोई निश्चित रणनीति नहीं है, जीतने की क्षमता ही एकमात्र मानदंड है। उधर कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात को लेकर सीईसी की बैठक में टिकटों के बंटवारे को लेकर चर्चा की है।

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