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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर बोली कांग्रेस, कहा- राज्यपाल ने नहीं निभाई संवैधानिक मर्यादा

Tue, 12 Nov 2019 07:06 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शरद पवार-उद्धव ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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मध्यप्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता और कांग्रेस पार्टी के लीगल सेल के चेयरमैन अनूप जी चौधरी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर पार्टी के एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्यपाल ने राज्य में भाजपा की सरकार न बन पाने पर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करके अपनी खीझ मिटाई है। अनूप जी चौधरी का कहना है कि राज्यपाल के इस कदम के खिलाफ कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में जाने का निर्णय लिया है।
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अनूप जी चौधरी का कहना है कि राज्यपाल ने सोमवार को एनसीपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। एनसीपी को इसके लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह समय मंगलवार 12 नवंबर की रात 8.30 बजे पूरा होना था, लेकिन इससे पहले ही राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। यह कहीं से भी संविधान सम्मत नहीं है। उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता का कहना है कि सरकार बनाने का न्यौता सबसे बड़े दल भाजपा को मिला था। उसे राज्यपाल ने 48 घंटे का समय दिया। शिवसेना को 24 घंटे का समय दिया।

जबकि एनसीपी को 15 घंटे के आस-पास का समय मिला। चौथा राजनीतिक दल कांग्रेस है। इसके 44 विधायक जीतकर आए हैं और इसे कोई समय ही नहीं मिला। चौधरी का कहना है कि संविधान के अर्टिकिल 14 में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर देने की बात कही गई है। इस तरह से राज्यपाल ने असंवैधानिक काम किया है।

 

राज्यपाल का काम है चुनाव से बचना

चौधरी का कहना है कि राज्यपाल का काम चुनाव की स्थिति से बचना है। चुनाव की संभावना को टालना और सरकार के गठन की संभावना तलाशना है। मेरे विचार में महाराष्ट्र के राज्यपाल ने इस दायित्व को नहीं निभाया है। उन्होंने बिना संभावना टटोले और इंतजार किए राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की। जबकि शिवसेना और एनसीपी दोनों ही दलों ने सरकार बनाने से कदम नहीं खींचे थे। दोनों ही दलों ने कुछ और समय की मांग की थी।

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