तेलंगाना में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में सत्ताधारी टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) ने आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के साथ एक समझौता किया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे लेकर चिंता व्यक्त की है क्योंकि आई-पैक की स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी, जिनके इस समय कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा चल रही है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस पार्टी के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से गठित किए गए आठ सदस्यीय समूह ने आई-पैक और टीआरएस के बीच हुए समझौते पर आपत्ति जताई है। वरिष्ठ नेताओं का यह समूह प्रशांत किशोर की ओर से साल 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति पर दी गई प्रस्तुति पर मंथन कर रहा है।
कुछ कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि किशोर के साथ किसी भी चुनाव व्यवस्था को लेकर आगे बढ़ने पर कांग्रेस में हितों का टकराव होगा। प्रशांत किशोर ने बिना किसी उम्मीद के कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। लेकिन, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस पर संदेह जताया है। इन नेताओं का कहना है कि प्रशांत पश्चिम बंगाल, बिहार और तेलंगाना में हमारे विरोधियों का सहयोग कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर से स्पष्टीकरण मांग सकती है कांग्रेस
उधर, टीआरएस और आई-पैक के बीच हुए समझौते को लेकर प्रशांत किशोर का कहना है कि मैं अब इस कमेटी से जुड़ा हुआ नहीं हूं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व इस बारे में किशोर से सवाल पूछेगा और उन्हें पार्टी में शामिल करने या किसी चुनावी रणनीति पर आगे बढ़ने से पहले इस पर स्पष्टीकरण मांगेगा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता प्रशांत को शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।
'दुश्मन के दोस्त पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए'
इससे पहले सोमवार को ही तेलंगाना सरकार में मंत्री केटी रामाराव ने इस सवाल का जवाब हां में दिया था जब उनसे पूछा गया था कि क्या उनकी पार्टी आई-पैक के साथ काम करेगी, प्रशांत किशोर के साथ नहीं। दूसरी ओर, कांग्रेस की तेलंगाना इकाई के प्रभारी मणिकम टैगोर ने आज एक ट्वीट में लिखा कि ऐसे किसी भी व्यक्ति पर कभी भरोसा मत करिए जो आपके दुश्मन का दोस्त हो।