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हार पर कांग्रेस में रार: वीरप्पा मोइली ने जी-23 के नेताओं को दी नसीहत, बोले- दोबारा सत्ता में आना है तो रवैया बदलें

Fri, 18 Mar 2022 04:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू

सार

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी के भीतर सुधार चाहती हैं, लेकिन जी-23 गुट वरिष्ठ नेताओं को निशाना बना रहा है। भाजपा एक बारहमासी पार्टी नहीं हो सकती है और यह मोदी के बाद की राजनीति की उथल-पुथल को बर्दाश्त नहीं कर पाएगी।
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एम वीरप्पा मोइली - फोटो : ANI
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विस्तार
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पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस में कलह मची हुई है। जी-23 के नेता बार-बार बैठक कर रहे हैं। वहीं, शुक्रवार को वरिष्ठ भाजपा नेता वीरप्पा मोईली ने भी बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बारहमासी पार्टी है। भाजपा और अन्य दल तो आते जाते रहते है। अगर दोबारा देश की सत्ता में लौटना है तो कांग्रेसियों को अपना रवैया बदलना चाहिए।

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उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेसियों को चुनाव जीतने के लिए जीवन, समाज और हर चीज के प्रति अपना दृष्टिकोण रखना चाहिए। सिर्फ इसलिए कि हम सत्ता में नहीं हैं, कांग्रेस नेताओं या कार्यकर्ताओं को घबराना नहीं चाहिए। भाजपा और अन्य आएंगे और जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो यहां रहेगी। इस दौरान उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के एक बयान का भी उदाहरण दिया। 
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी के भीतर सुधार चाहती हैं लेकिन जी-23 गुट वरिष्ठ नेताओं को निशाना बना रहा है। भाजपा एक बारहमासी पार्टी नहीं हो सकती है और यह मोदी के बाद की राजनीति की उथल-पुथल को बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। 
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वहीं, इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी  गुलाम नबी आजाद और जी-23 समूह के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच मुलाकात होगी। हालांकि बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

इससे पहले बुधवार को जी-23 के असंतुष्ट नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के आवास पर बैठक बुलाई थी। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि पार्टी के लिए एकमात्र रास्ता सामूहिक और समावेशी नेतृत्व और सभी स्तरों पर निर्णय लेने के मॉडल को अपनाना है।


गौरतलब है कि गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, शशि थरूर, आनंद शर्मा समेत कांग्रेस के जी-23 नेता जमीनी स्तर से लेकर कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) स्तर तक पार्टी और संगठनात्मक चुनावों में तत्काल सुधार की मांग करते रहे हैं। 

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