केरल में राज्यपाल और मुख्यमंत्री पी विजयन की सरकार के बीच विश्वविद्यालयों के संचालन में कथित राजनीतिक दखल के विवाद में कांग्रेस नेता रमेश चेनिथला भी शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को उन्होंने राष्ट्रपति को डीलिट की उपाधि देने की राज्यपाल की सिफारिश को खारिज करने के फैसले को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता रमेश चेनिथला ने शुक्रवार को सवाल किया कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को केरल विश्वविद्यालय की मानद उपाधि डीलिट से सम्मानित किए जाने की जो सिफारिश की थी, क्या उसे विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रदेश सरकार के निर्देश पर खारिज किया है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या यही वह विवाद है जिसे लेकर राज्यपाल ने कहा था कि उनके और सरकार के बीच विवाद हैं और ये विवाद देश की गरिमा को प्रभावित करने वाले मुद्दों को लेकर भी हैं।
विज्ञापन
केरल के राज्यपाल और राज्य की सरकार के बीच हालिया विवादों को लेकर चेनिथला ने दोनों से छह सवाल पूछे और उनसे अनुरोध किया कि इन प्रश्नों का जल्द से जल्द उत्तर दें जिससे लोगों के बीच इस संबंध में उठ रहे संदेह को लेकर स्थिति साफ हो जाए। चेनिथला ने राज्यपाल से यह अपील भी की कि वह इससे संबंधित सबी तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक करें और राज्य के लोगों को विश्वास में लें। उन्होंने कहा, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के चांसलर के तौर पर राष्ट्रपति को डीलिट की उपाधि देने की सिफारिश की थी।
सरकार साफ करे किस आधार पर खारिज की राज्यपाल की सिफारिश
उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन हमें पता चला है कि कुलपति ने इस सिफारिश को सरकार के पास भेज दिया। सरकार को यह साफ करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर राज्यपाल की सिफारिश को खारिज करने का फैसला लिया है और किस आधार पर कुलपति ने विश्विद्यालय के चांसलर की सिफारिश को सरकार के पास भेज दिया।' कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह राज्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व संकट था। उन्हें अनुमति के लिए प्रक्रिया के अनुसार इसे यूनिवर्सिटी सिंडिकेट या सीनेट के सामने पेश करना चाहिए था।
विज्ञापन
विश्वविद्यालयों का प्रतीकात्मक अध्यक्ष बनने में रुचि नहीं रखता: चेनिथला
राज्य के विश्वविद्यालयों के संचालन में कथित राजनीतिक दखलअंदाजी को लेकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और राज्य सरकार के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। गुरुवार को राज्यपाल ने कहा था कि मैं उच्च शिक्षा मंत्री को चांसलर की शक्तियां हस्तांतरित करने के लिए तैयार हूं, जो विश्वविद्यालों को प्रो चांसलर भी हैं। इसे लेकर रमेश चेनिथला ने कहा कि मेरे लिए इस तरह के माहौल में चांसलर के तौर पर काम करना संभव नहीं है। मैं विश्वविद्यालयों का महज प्रतीकात्मक अध्यक्ष बनने में कोई रुचि नहीं रखता हूं।