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पिछली बार 17 सीटें जीतने वाली भाजपा के सामने कांग्रेस-जेडीएस की बड़ी चुनौती

Thu, 18 Apr 2019 05:29 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू
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Congress-JDU (File)
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कांग्रेस ने जेडीएस के साथ गठबंधन किया है। वह खुद 20 सीटों पर लड़ रही है। बाकी जेडीएस को दी गई हैं। दूसरी ओर, भाजपा कर्नाटक की 28 में से 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने मांड्या सीट कांग्रेस से बागी होकर आई निर्दलीय प्रत्याशी के लिए छोड़ी है। 2014 में भाजपा ने प्रदेश की 17 सीटें जीती थीं, कांग्रेस को नौ और जेडीएस को दो सीटें मिली थीं। चुनाव अब तक पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और उनके परिवार से खड़े किए गए प्रत्याशियों के इर्द-गिर्द केंद्रित नजर आ रहे हैं, हालांकि कई अन्य महत्वपूर्ण नेता भी अपनी छवि के चलते मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। कांग्रेस के सांसद व पुराने सिपाही मल्लिकार्जुन खरगे, सात बार कोलार से लोकसभा पहुंच चुके केएच मुनियप्पा और पूर्व मुख्यमंत्री व सोनिया गांधी के करीबी वीरप्पा मोइली समेत कई वीआईपी प्रत्याशी मैदान में हैं।

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तुमकुरः स्थानीय कांग्रेसी जेडीएस से संतुष्ट नहीं

जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा बेंगलुरु के निकट तुमकुर से मैदान में हैं। वे अपने समुदाय वोक्कालिंगा मतदाताओं के साथ-साथ अल्पसंख्यकों और कुरुबा समुदाय के वोटों पर निर्भर हैं। यह कांग्रेस की सीट रही है, लेकिन गठबंधन के चलते जेडीएस को दी गई। कांग्रेस का पारंपरिक मतदाता इसे लेकर बहुत उत्साहित नहीं है। खुद कांग्रेस कार्यकर्ता भी प्रचार से दूर हैं। देवगौड़ा के सामने भाजपा के जीएस बसवाराज हैं।

देवगौड़ा की सीट पर पौत्र  

हासन में देवगौड़ा ने अपने पौत्र व मंत्री एचडी रेवन्ना के पुत्र प्रज्ज्वल को जेडीएस की ओर से उतारा है। यह देवगौड़ा की सीट रही है। देवगौड़ा ने रामकृष्ण हेगड़े की कैबिनेट में रहते यहां काम करवाया। हासन के किसानों को खेती की सिंचाई के लिए व्यापक मात्रा में पानी मिलता है, तो इसके पीछे देवगौड़ा द्वारा हेमवती नदी पर बनाए बैराज को श्रेय दिया जाता है। उन्होंने सिंचाई के लिए कावेरी नदी को भी जोड़ा। उन्हें भाजपा के ए मंजू चुनौती दे रहे हैं।
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अंदरूनी कलह में उलझी कांग्रेस

केएच मुनियप्पा ने कोलार सुरक्षित सीट सात 


बार जीती है, किसी और मौके पर यह तथ्य एक प्रत्याशी का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए काफी है। वे 2014 में यह सीट 50 हजार वोट के अंतर से जीते थे, लेकिन कांग्रेस के इस पुराने सिपाही के लिए इस बार मुकाबला कड़ा रहेगा। उन्हें पार्टी के ही चार विधायकों के विरोध का सामना करना पड़ा रहा है। क्षेत्र की छह में से पांच विस सीटें कांग्रेस के पास हैं और एक जेडीएस के पास। उन्हें भाजपा के एस मुनिस्वामी से टक्कर मिल रही है।

कांग्रेसी गढ़ में भाजपा का हमला

वीरप्पा मोइली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के उम्मीदवार हैं। उनके सामने भाजपा प्रत्याशी बीएन बचेगौड़ा हैं। बचेगौड़ा को क्षेत्रीय वोक्कालिगा समुदाय का मजबूत नेता माना जाता है, ऐसे में वे मोईली के लिए जो चुनौती पेश कर रहे हैं, इसके बारे में खुद मोईली ने नहीं सोचा था। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरीश रामास्वामी कहते हैं कि इस बार भाजपा राणनीति बनाकर ऐसी सीटों को टारगेट कर रही है, जहां कांग्रेस-जेडीएस के पुराने सिपाही मैदान में हैं। 

भाजपा ने निर्दलीय को दिया समर्थन

जेडीएस के गढ़ मांड्या में सीएम एचडी कुमारास्वामी के पुत्र व देवगौड़ा के एक और पौत्र निखिल गौड़ा संघर्ष का सामना कर रहे हैं। पूर्व अभिनेत्री सुमालता निर्दलीय के रूप में उन्हें कड़ी चुनौती दे रही हैं। सुमालता दिवंगत सांसद व लोकप्रिय नेता अंबरीश की पत्नी हैं। भाजपा ने यहां प्रत्याशी न उतार कर उन्हें समर्थन दिया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सुमालता प्रदेश में 40 वर्ष के इतिहास में पहली निर्दलीय सांसद बन सकती हैं।

सूर्या को टिकट, भाजपा में कलह 

भाजपा के लिए बेंगलूरू की उत्तर व दक्षिण सीटें उसका गढ़ मानी जाती हैं। लेकिन उसके लिए मुश्किलें तेजस्वी सूर्या को बेंगलूरू दक्षिण में खड़ा करने से शुरू हुई हैं। यहां सूर्या को दिवंगत केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी की जगह टिकट दिया गया है। इसे पार्टी में अंदरूनी दरार और गढ़ के खतरे में पड़ने के तौर पर देखा जा रहा है। सूर्या को कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद से चुनौती मिल रही है।
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