कांग्रेस का आरोप है कि अदाणी मामले की जांच करते समय माधबी पुरी बुच सेबी की चेयरपर्सन के रूप में काम कर रही थीं और इसी दौरान उन्होंने अदाणी की कंपनियों में निवेश भी कर रखा था, जिससे दोनों के बीच आपसी हित सामने आते हैं।
कांग्रेस सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच विवाद को बड़े स्तर पर उठाने की तैयारी कर रही है। उसका आरोप है कि अदाणी मामले की जांच करते समय माधबी पुरी बुच सेबी की चेयरपर्सन के रूप में काम कर रही थीं और इसी दौरान उन्होंने अदाणी की कंपनियों में निवेश भी कर रखा था, जिससे दोनों के बीच आपसी हित सामने आते हैं। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि इस मामले की पूरी सच्चाई बाहर लाने के लिए इस मामले की जांच जेपीसी से कराई जानी चाहिए। कांग्रेस पार्टी 22 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर इस विवाद को जनता की अदालत में उठाने की तैयारी कर रही है।
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कांग्रेस ने जेपीसी से जांच कराने की मांग की
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सेबी की अध्यक्ष माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने गौतम अदाणी की दो ऑफशोर कंपनियों में निवेश किया था। उन्होंने कहा कि इस जानकारी को सुप्रीम कोर्ट से छिपाया गया। अदाणी मामले की जांच के दौरान भी माधबी बुच ने इसका कोई खुलासा नहीं किया, जबकि इसी दौरान वे अदाणी संबंधित मामलों की जांच कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस मामले का सच क्या है, यह तभी सामने आ सकता है जब जेपीसी के माध्यम से इसकी पूरी जांच कराई जाए।
कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी पर भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अदाणी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सेबी की तरफ से जांच की गई। लेकिन सेबी अध्यक्षा माधबी बुच की भूमिका ने मामले की रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पीएम के दौरे के बाद श्रीलंका में अदाणी ग्रीन एनर्जी पावर परचेज एग्रीमेंट 20 साल के लिए 367 करोड़ का निवेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के कारण अदाणी की कंपनी को बांग्लादेश और इस्राइल में बिजनेस मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे प्रधानमंत्री और अदाणी के संबंधों का पता चलता है। इसकी सच्चाई जानने के लिए पूरे मामले की जांच जेपीसी से होनी चाहिए।