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कांग्रेस का सरकार पर निशाना- डरे हुए हैं जम्मू-कश्मीर के लोग, संसद में बयान दें पीएम

Sat, 03 Aug 2019 07:17 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुलाम नबी आजाद - फोटो : ANI
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सरकार द्वारा कश्मीर एडवाइजरी जारी करने के बाद घाटी में सियासत तेज हो गई है। वहीं, कांग्रेस ने भी कश्मीर एडवाइजरी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा कल जारी की गई एडवाइजरी चिंताजनक है और पूरे देश के साथ जम्मू-कश्मीर के लोग भी डरे हुए हैं। किसी भी सरकार ने कभी भी पर्यटकों को वापस जाने के लिए नहीं कहा। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

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आजाद ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में बयान देना चाहिए ये उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा, 
सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को राज्य में क्यों भेजा गया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा अमरनाथ यात्रा को रोकने और तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को राज्य छोड़ने के लिए कहने के बाद हर कोई सदमे की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि भय और आशंका के माहौल ने राज्य को जकड़ लिया है।
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इससे पहले शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर मामले पर गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि केंद्र सरकार के फैसले राज्य में भय का माहौल बना रहे हैं। आजाद ने कहा था, 'कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर नीति योजना समूह की पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से आ रही रिपोर्ट पर चिंता जताई गई। ये रिपोर्ट भारत सरकार के इरादों को लेकर दहशत और आशंकाओं का माहौल बना रही हैं।'

आजाद ने कहा था- जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच यह चिंता है कि सरकार अनुच्छेद 35ए और 370 को खत्म करने का इरादा रखती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के मुताबिक पार्टी के समूह ने यह मत भी जाहिर किया कि जम्मू-कश्मीर को दी गई संवैधानिक गारंटी बरकरार रखी जाए।

आजाद ने भारत सरकार से अपील की कि ऐसा कोई भी निर्णय न लिया जाए जो राज्य की स्थिति के लिए ठीक न हो। आजाद ने कहा, 'सुरक्षा बलों की बड़ी पैमाने पर तैनाती, अमरनाथ यात्रा में कटौती और पर्यटकों, यात्रियों और वहां के बाशिंदों के लिए जारी की जाने वाली एडवाइजरी से असुरक्षा और भय का माहौल बन रहा है। हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि ऐसा कोई भी फैसला न लें जिससे राज्य में गंभीर संकट की स्थिति आए।'

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