पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने ट्वीट किया कि यह वो पत्र है, जिसके जरिए 2009 में प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया था। हमारे प्रधानमंत्री आदतन झूठे हैं। मैं इस पत्र को पहले जारी नहीं कर सका, क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त था।
देश में 70 साल बाद चीते को लाने के श्रेय पर अब विवाद हो गया है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने 2009 में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की थी। रमेश ने इस संबंध में एक पत्र भी ट्विटर पर जारी किया। उन्होंने पीएम के लगाए गए आरोपों को आदतन झूठा करार दिया।
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दरअसल, शनिवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते छोड़ने के दौरान निशाना साधा था कि सात दशक पहले देश में विलुप्त हो जाने के बाद चीतों को लाने के लिए कोई रचनात्मक प्रयास नहीं किए गए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने ट्वीट किया कि यह वो पत्र है, जिसके जरिए 2009 में प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया था। हमारे प्रधानमंत्री आदतन झूठे हैं। मैं इस पत्र को पहले जारी नहीं कर सका, क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त था। पत्र को उन्होंने तत्कालीन पर्यावरण और वन मंत्री के रूप में 2009 में भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट के एम के रंजीतसिंह को लिखा था।
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पत्र में क्या लिखा है?
पत्र में लिखा है, मुझे आपका 28 सितंबर और 6 अक्तूबर 2009 का पत्र मिला है। कृपया चीता के मामले में एक विस्तृत रोडमैप तैयार करें, जिसमें विभिन्न संभावित स्थलों का विस्तृत विश्लेषण शामिल होना चाहिए। विश्लेषण भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा बीएनएचएस और डब्ल्यूटीआई जैसे अन्य संगठनों के सहयोग से किया जाना चाहिए। आप इस अध्ययन में राज्य वन विभागों को भी साथ ले सकते हैं। उम्मीद है कि जनवरी, 2010 के अंत तक रोडमैप पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा।