केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली अमेरिका में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। ऐसे में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार एक फरवरी को सदन में अंतरिम बजट-2019-2020 पेश किया। गोयल के पास वित्त के अलावा रेलवे, कोयला, कारपोरेट का भी प्रभार हैं। कई कार्यालय की तमाम व्यस्तता के बाद भी सहज, सरल पीयूष गोयल ने हर वर्ग का ख्याल रखने वाला बजट पेश किया है। पेश है हमारे समूह सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री और वरिष्ठ समाचार संपादक शशिधर पाठक से हुई विशेष बातचीत के अंश।
प्रश्न- आपने लोगों की पसंद का बजट का पेश किया है, लेकिन विपक्ष इसे 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया चुनावी बजट बता रहा है। आपकी प्रतिक्रिया है?
उत्तर- देखिए, यह विपक्ष की आदत है। हमारी सरकार ने पिछले पांच साल के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश का विकास किया है। जन सेवा और समाज सेवा की है। हमने वर्ग का और उनके हितों का ध्यान रखा है। यह दुर्भाग्य है कि कांग्रेस पार्टी की नजरें हमेशा चुनाव पर रहती है और हमारी नजर में हमेशा देश की सेवा, राष्ट्र का हित रहता है।
प्रश्न- इस बजट को आप कितना लोक लुभावन और लोगों के हित में मान रहे हैं?
उत्तर- इसे आप खुद महसूस करिए। आप देखिए, इस बजट में हर वर्ग को लाभ और सम्मान दिया गया है। चाहे वह मध्यम वर्गीय परिवार हो या असंगठित क्षेत्र, गरीब, मजदूर, किसान। सभी का पूरा ध्यान रखा गया है। मैं समझता हूं कि इस बजट के माध्यम से जो देश की विकास दर है, मंहगाई में कमी और देश के आर्थिक ढांचे में मजबूती है, वह और तेजी से आगे बढ़ेगी। इससे देश की जनता और राष्ट्र की सेवा होगी।
प्रश्न- क्या आपको नहीं लगता कि इस तरह का बजट पहले या फिर कम से कम पिछले बजट के दौरान आया होता? ऐसा होता तो तस्वीर कुछ और होती?
उत्तर- मेरा मानना है कि हर काम का एक समय होता है। मैं दोहरा रहा हूं। पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जनता को अलग-अलग प्रकार के अलग-अलग तरीके से लाभ पहुंचाए। इसके पीछे हमारा उद्देश्य देश के विकास के साथ-साथ जनता की सेवा करना था। हमारा मानना था कि हम पहले देश की माता-बहनों के लिए शौचालय की व्यवस्था करें, ताकि उनके आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे।
हमारा मानना था कि पहले गरीब माता-बहनों के पास उज्जवला योजना के माध्यम से रसोई गैस पहुंचे ताकि उन्हें धुंआ का दंश न झेलना पड़े। हमारी दृष्टि में आयुष्मान भारत योजना थी ताकि देश के गरीब, परिवारों को भी मुफ्त में इलाज मुहैय्या कराया जा सके। यह सब वह काम हैं, जिनके माध्यम से जन सेवा, जनता की सेवा, राष्ट्र की सेवा और राष्ट्र का विकास करने का लक्ष्य प्रमुख रहा।
प्रश्न- सवाल फिर खड़ा होता है। यह अंतरिम बजट है, लेकिन इसका स्वरुप पूर्ण बजट जैसा रहा है?
उत्तर- आप बजट को देखिए। अभी तक हमने इसमें कोई नई चीज ज्यादा नहीं पेश की है। असंगठित क्षेत्र के लिए 3000 रुपये की पेंशन और किसानों के लिए हर साल 6000 रुपये ही देने का प्रावधान किया है। यह इसी साल का पैसा है और इसी वित्तीय वर्ष में दिया जाना है। मध्यम वर्ग के लिए पांच लाख रुपये तक की आमदनी वाले परिवारों को आयकर में राहत दे दी है। यह किया जाना जरूरी था, क्योंकि लोग जून-जुलाई में टैक्स दाखिल करते तो उन्हें मुश्किल आती। एक और फायदा छोटे और अफोर्डेबल हाऊसिंग वालों को दिया है।
प्रश्न- पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए हैं और इनमें से तीन राज्यों के चुनाव नतीजे अलग आए हैं। क्या बजट में भी इन तीन राज्यों के चुनाव नतीजे का प्रभाव है?
उत्तर- मैं बताना चाहता हूं कि ये नतीजे चौकाने वाले या अलग नहीं हैं। देश का मीडिया राजस्थान में अपने पूर्वानुमानों में भाजपा को खत्म बता रहा था। मीडिया हमें 10 और इसके आस-पास सीट दे रहा था। लेकिन मतदान के बाद आए नतीजों को आप जरा देखिए। हम जीत के बिल्कुल करीब हैं। मैं समझता हूं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर लोगों में जो आकर्षण और प्यार है, उसका असर बरकरार है। 2019 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इस चुनाव में देश की जनता तय करेगी कि उसे किसके साथ जाना है।
कौन देश को बेहतर बना सकता है, कौन देश की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकता है, कौन देश, देश की जनता और लोगों का हित कर सकता है। मैं समझता हूं कि जनता इसी को आधार बनाकर 2019 के लिए अपना प्रधानमंत्री चुनेगी। बजाय इसके कि जनता बिखरे हुए, बिना किसी नैतिकता तथा अलग-अलग राज्य में अलग-अलग नेताओं को महत्व दे जो अपने निजी हित को ध्यान में रखकर साथ आए हैं।
प्रश्न- क्या बजट -2019 इसमें कोई अहम भूमिका निभाएगा?
उत्तर- मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं। यह हमारे पांच साल की यात्रा(जर्नी) का नतीजा है। हमने इस बजट को लोकसभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखकर नहीं तैयार किया है।