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Congress: 'लद्दाख को राज्य का दर्जा देने का वादा होगा पूरा या...', PM मोदी पर जमकर भड़के जयराम रमेश

Thu, 21 Mar 2024 11:50 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जयराम रमेश ने कहा कि आज प्रधानमंत्री ने अपनी भूटान फोटो-ऑप्स को स्थगित कर दिया है, इसलिए हमें उम्मीद है कि वह लद्दाख के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं।
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जयराम रमेश - फोटो : PTI
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विस्तार
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कांग्रेस ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। साथ ही पूछा कि पीएम का क्या लद्दाख के लोगों को दी गई 'मोदी की गारंटी' को बनाए रखने का कोई इरादा है। बता दें, मोदी की भूटान यात्रा आज होनी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण इसे टाल दिया गया है।

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक लंबा पोस्ट कर कहा, 'आज प्रधानमंत्री ने अपनी भूटान फोटो-ऑप्स (फोटो बाजी) को स्थगित कर दिया है, इसलिए हमें उम्मीद है कि वह लद्दाख के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं।'

उन्होंने कहा कि क्योंकि आज प्रधानमंत्री ने अपनी भूटान फोटो-ऑप्स को स्थगित कर दिया है, हमें उम्मीद है कि वह लद्दाख के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं। मोदी सरकार लद्दाख में नौकरशाही के माध्यम से अपना शासन चला रही है, जिसने निर्वाचन के स्थानीय संस्थानों का मजाक बनाकर रख दिया है।
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जयराम रमेश ने आगे कहा कि तीन फरवरी को स्थानीय लोगों ने लद्दाख बंद किया था। इसके बाद से यहां के लोग बड़ी संख्या में इस हालात के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निडर और बेबाक पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लद्दाख के लोगों की पीड़ा की तरफ राष्ट्रीय और वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।

संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे लद्दाख के लोग
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि लद्दाख के लोग प्रधानमंत्री मोदी से चार सवालों के जवाब चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, जिसमें राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना का सुझाव दिया है। संयोग से भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के लद्दाख हिल काउंसिल चुनावों के लिए अपने घोषणापत्र में इसका वादा भी किया था। 

उन्होंने पूछा, 'क्या प्रधानमंत्री का अपनी 'मोदी की गारंटी' को बरकरार रखने का कोई इरादा है? यदि नहीं, तो उन्होंने इसका वादा क्यों किया? उनके कार्यभार संभालने के 10 साल बाद भी यह मुद्दा लंबित क्यों है?'

लद्दाख के लोगों से विचार-विमर्श किया गया?
उन्होंने आगे कहा कि साल 2018 में जम्मू-कश्मीर – जो कि तब एक राज्य था – में भाजपा-पीडीपी सरकार के गिरने के बाद से, लद्दाख के लोगों के पास राज्य स्तर पर कोई प्रतिनिधि सरकार नहीं है। पांच अगस्त, 2019 को लद्दाख को बिना राज्य विधानसभा के एक अलग केंद्र शासित प्रदेश में परिवर्तित करके, मोदी सरकार ने लद्दाख के लोगों के लिए किसी भी स्थानीय शासन की संभावनाओं को खत्म कर दिया है।

उन्होंने पूछा, 'जब प्रधानमंत्री ने इसे एक अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया तो उनके पास लद्दाख के लिए क्या विजन था? क्या इस दृष्टिकोण को बनाते समय कभी लद्दाख के लोगों से विचार-विमर्श किया गया, या उनसे परामर्श लिया गया?'

कौन झूठ बोल रहा?
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के शासन में भारत ने चीन द्वारा किए गए कब्जे के कारण लद्दाख के उत्तर में स्थित चांगथंग मैदानों में महत्वपूर्ण चारागाहों से नियंत्रण खो दिया है। ऐसा होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संकट के अलावा, लद्दाख के खानाबदोश घुमंतू लोगों के लिए एक गंभीर सामाजिक आर्थिक मुद्दा भी है। लेकिन, प्रधानमंत्री ने 19 जून, 2020 को चीन पर सर्वदलीय बैठक में यह कहते हुए चीन को क्लीन चिट दे दी कि एक भी चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में नहीं घुसा है।

उन्होंने कहा कि यहां दो ही बात हो सकती है या तो लद्दाख के लोग या भारत के प्रधानमंत्री देश से झूठ बोल रहे थे। उन्होंने पूछा कि सच क्या है मोदी जी - लद्दाख के लोग झूठे हैं या आप झूठे हैं?

भूमि आवंटन नीति का उद्देश्य क्या है?
जयराम रमेश ने कहा कि प्रस्तावित लद्दाख औद्योगिक भूमि आवंटन नीति 2023 में सिंगल-विंडो क्लीयरेंस कमेटी का सुझाव है, जिसमें केवल सरकारी अधिकारी और एक इंडस्ट्री के प्रतिनिधि होंगे। इसमें कोई परिषद सदस्य, कोई सिविल सोसाइटी समूह और कोई पंचायत प्रतिनिधि इन कमेटियों का हिस्सा नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज में किसी औद्योगिक परियोजना पर विचार करने के लिए कोई पर्यावरण या सांस्कृतिक मानदंड भी नहीं है, न ही इसमें किसी सार्वजनिक परामर्श का प्रावधान है। उन्होंने पूछा कि लद्दाख जैसे पारिस्थितिकी रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में, खानाबदोश घुमंतू जनजातियों और अन्य जनसांख्यिकीय समूहों की आबादी वाले क्षेत्र में, इस प्रस्तावित भूमि आवंटन नीति का उद्देश्य क्या है? क्या यह लोगों की कीमत पर अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने का प्रधानमंत्री का एक और प्रयास है?

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