उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के दो प्रभारी बनाए जाने के बाद दो प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए जा सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष यूपी में संगठन को माइक्रो लेवल पर बांटकर उसकी सीधी निगरानी करना चाहते हैं ताकि अगले विधानसभा चुनाव तक पार्टी पर लगा ये धब्बा हट जाए कि यूपी में उसका संगठन नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार के रायबरेली में अपनी मंशा जता दी है कि अगले विधानसभा चुनाव में वे यूपी में कांग्रेस की सरकार चाहते हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक संगठनात्मक ढांचे को खड़ा करने और मजबूती देने के लिए ही दो प्रभारियों के नीचे दो अध्यक्ष के फार्मूले पर काम चल रहा है। वहीं दिल्ली की तर्ज पर एक वरिष्ठ नेता को अध्यक्ष बनाकर उसके नीचे चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए जा सकते हैं। राहुल के दिल्ली लौटते ही वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक होनी है। पूर्वी यूपी की टीम में प्रियंका गांधी की पसंद महत्व रखेगी लिहाजा उनकी राय भी अहमियत रखेगी।
यूपी के जातीय समीकरण को साधने के लिए कांग्रेस राज्य के हर उस चेहरे को सामने लाना चाहती है जिसके समाज में संदेश जाए। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को बदला जाना इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं को सामने लाया जाना है। छत्तीसगढ़ के प्रभारी और दलित वर्ग के पीएल पुनिया पार्टी नेतृत्व से यूपी लौटने की बात कह चुके हैं ऐसे में पुनिया की नई भूमिका तय होनी है।
ब्राह्मणों के नेता और वरिष्ठता के नाते प्रमोद तिवारी को फ्रंट पर लाया जाना है तो युवा और इसी वर्ग के जतिन प्रसाद भी लंबे समय से संगठन में जगह तलाश रहे हैं। पूर्वी यूपी में संजय सिंह का मजबूत दावा है। पश्चिम में कांग्रेस एक जाट चेहरा तलाशने के साथ गुर्जर समाज में भी सीधी पैठ चाहती है। हर राज्य की तरह यूपी में अभी तक एआईसीसी के चार सचिव भी अलग-अलग हिस्सों में काम करते थे ऐसे में उनकी संख्या भी छह की जा सकती है।