स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों पर आधारित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन की घटना से प्रेरित फिल्म चलो जीते हैं को समाज के मूक नायकों के लिए लाखों स्कूलों और कई सिनेमाघरों में दिखाया जा रहा है। इसे लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय का राष्ट्र निर्माण का नया विचार कक्षाओं को प्रचार थिएटर के रूप में इस्तेमाल करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों में दिखाई गई फिल्म को लेकर कांग्रेस ने हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय का राष्ट्र निर्माण का नया विचार कक्षाओं को प्रचार थिएटर के रूप में इस्तेमाल करना है। छात्रों को प्रधानमंत्री के बचपन का महिमामंडन करने वाली फिल्म देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि शिक्षा मंत्रालय के पास राष्ट्र निर्माण का एक नया विचार है कि कक्षाओं को प्रचार थिएटर के रूप में इस्तेमाल करना। छात्रों को चरित्र और जिम्मेदारी के बहाने प्रधानमंत्री के बचपन का महिमामंडन करने वाली फिल्म देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा पाठ्यपुस्तकों की जगह पीआर स्क्रिप्ट लाना चाहती है। शायद अगला विषय होगा: लोकतंत्र में हेराफेरी कैसे करें 101 या 30 दिनों में जुमलों में महारत हासिल करना। हमारे बच्चों को वास्तव में वास्तविक शिक्षा 21वीं सदी के लिए कौशल और भविष्य के लिए वास्तविक रोजगार के अवसरों की आवश्यकता है, न कि किसी एक व्यक्ति की राज्य प्रायोजित जीवनी की।
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स्कूलों में दिखाई जा रही फिल्म
स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों पर आधारित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन की घटना से प्रेरित फिल्म चलो जीते हैं को समाज के मूक नायकों के लिए लाखों स्कूलों और कई सिनेमाघरों में दिखाया जा रहा है। 2018 में रिलीज हुई यह फिल्म 17 सितंबर से दो अक्तूबर के बीच स्कूलों में दिखाई जा रही है।
छात्र इसे मूक नायकों चौकीदार, सफाई कर्मचारी, ड्राइवर, चपरासी और अन्य लोगों के साथ देख रहे हैं। पीएम मोदी बुधवार को 75 वर्ष के हो गए और स्क्रीनिंग की शुरुआत उनके जन्मदिन के साथ हुई। फिल्म चलो जीते हैं: सेवा का सम्मान पहल के तहत दिखाई जा रही है। फिल्म देखने के बाद मूक नायकों को सम्मानित करने के लिए समारोह भी आयोजित हो रहे हैं।