प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है, जिसमें मेसर्स रामप्रस्थ प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (मेसर्स आरपीडीपीएल) के मामले में 255.28 करोड़ रुपये (लगभग) की संपत्ति कुर्क की गई है। समूह कंपनियों के निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने 2600 से अधिक घर खरीदारों से 1100 करोड़ रुपये वसूल लिए। घर/फ्लैट खरीदारों से वादा किया गया था कि उन्हें तीन-चार साल में आशियाना दे दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लोगों को 14 साल भी घर/फ्लैट नहीं मिल सका। घर/प्लॉट खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की गई। उनका पैसा दूसरे कार्यों में लगा दिया गया।
ईडी के मुताबिक, अनंतिम रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में मेसर्स आरपीडीपीएल, उसकी समूह कंपनियों और निदेशकों/निदेशकों के रिश्तेदारों/प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों के विभिन्न भूखंड/भूमि और आवासीय फ्लैट/व्यावसायिक भवन शामिल हैं। ईडी ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), नई दिल्ली और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि मेसर्स आरपीडीपीएल और उसके प्रमोटर, तय समय सीमा के भीतर फ्लैट और प्लॉट देने में विफल रहे। घर खरीदारों/प्लॉट खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई। उन्हें 14 साल में भी घर/फ्लैट नहीं मिल सका।
ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स आरपीडीपीएल ने 2008-2011 में गुरुग्राम के सेक्टर 37डी, 92, 93 और 95 में स्थित प्रोजेक्ट एज, प्रोजेक्ट स्काईज, प्रोजेक्ट राइज और रामप्रस्थ सिटी (प्लॉटेड कॉलोनी प्रोजेक्ट) जैसी विभिन्न परियोजनाएं शुरू की थीं। लॉन्च होने के 3-4 साल के भीतर फ्लैटों/प्लॉट की गई जमीनों पर कब्जा देने का वादा किया गया था। ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स आरपीडीपीएल ने उक्त परियोजनाओं के लिए 2600 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 1100 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। मेसर्स आरपीडीपीएल के प्रमोटरों/निदेशकों ने घर खरीदारों से एकत्र किए गए करोड़ों रुपयों को वादे के मुताबिक, घरों और फ्लैट के निर्माणकार्य में नहीं लगाया।
वह पैसा, भूमि पार्सल आदि की खरीद के लिए अग्रिम के रूप में निदेशकों ने अपनी समूह कंपनियों को दे दिया। इसके चलते अंततः अभी तक फ्लैट और प्लॉट वितरित नहीं किए जा सके।
इससे पहले इस मामले में, ईडी, गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने 21 जुलाई को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स आरपीडीपीएल के दोनों निदेशकों और बहुसंख्यक शेयरधारकों अरविंद वालिया व संदीप यादव को गिरफ्तार किया था। दोनों व्यक्ति फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
इसके अलावा, ईडी ने इस केस में तलाशी अभियान भी चलाया था। इसके बाद एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप मेसर्स आरपीडीपीएल, इसकी समूह कंपनियों और निदेशकों/निदेशकों के रिश्तेदारों की लगभग 572.21 करोड़ रुपये की विभिन्न बैंक बैलेंस, चल संपत्ति, अचल संपत्तियों को कुर्क/फ्रीज किया गया था। इस मामले में अब तक कुल कुर्की/जब्ती 827.49 करोड़ रुपये (लगभग) की है।