चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री ने श्रेय लेने का आरोप लगाया है। साथ ही कांग्रेस ने एक्स (ट्विटर) पर गुरुवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की प्रगति की निरंतरता को दिखाने के लिए विक्रम साराभाई, एपीजे अब्दुल कलाम जैसे अंतरिक्ष कार्यक्रम के दिग्गजों के साथ जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की कई तस्वीरें साझा कीं। कांग्रेस ने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय की सामूहिक सफलता है और इसरो की उपलब्धि निरंतरता की गाथा को दर्शाती है और वास्तव में शानदार है।
भाजपा ने किया यह दावा
वहीं, भाजपा ने दावा किया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में चंद्रयान मिशन का एलान किया था जो 2008 में पूरा हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने चंद्रयान-2 मिशन को 2014 तक रोके रखा। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के चंद्र मिशन को तेजी से आगे बढ़ाया गया। साथ ही भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह नेहरू के अस्तित्वहीन वैज्ञानिक स्वभाव के बारे में एक मिथक पैदा कर रही है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर कई तस्वीरें साझा कीं। इनमें से एक में साराभाई पंडित नेहरू को समझाते हुए दिख रहे हैं तो दूसरी तस्वीर में अंतरिक्ष वैज्ञानिक ईवी चिटनिस भी ऐसा ही करते दिख रहे हैं। रमेश ने कहा कि दोनों तस्वीरें 10 फरवरी, 1962 को साराभाई की अध्यक्षता में आईएनसीओएसपीएआर (अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति) की औपचारिक घोषणा से ठीक एक पखवाड़े पहले अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) परिसर में ली गई थीं।
उन्होंने 1980 की एक तस्वीर भी दोबारा पोस्ट की। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष सतीश धवन के साथ नजर आ रही हैं।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट साझा कर लोगों से पूछा कि क्या वे जानते हैं कि यह नेहरू ही थे जिन्होंने आईएनसीओएसपीएआर की स्थापना की थी जो इसरो के रूप में देश का गौरव बढ़ा रहा है। इससे पहले रमेश ने 30 दिसंबर 2019 में अपने पीआरएल के दौरे की तस्वीर साझा की और कहा कि पीआरएल की स्थापना नवंबर 1947 में विक्रम साराभाई ने की थी और उन्होंने हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम में अमूल्य योगदान दिया है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
इससे पहले कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग का श्रेय ले रहे हैं, लेकिन वह इसरो और उसके वैज्ञानिकों का सहयोग करने में बुरी तरह विफल रहे हैं।