बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन पर बयान क्या दिया, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का फोन चर्चा में आ गया। लेकिन यह कम लोगों को पता है कि कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से खरगे समय समय पर नीतीश कुमार के संपर्क में रहते हैं। नीतीश कुमार के संपर्क में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी रहते हैं। वहीं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव लगातार 10 जनपथ से अपने रिश्ते की अहमियत बनाए हुए हैं। राहुल गांधी को उन्होंने ऐसे ही मटन बनाना नहीं सिखाया था। कहते हैं इस बहाने बड़ा संदेश देने की कोशिश हुई थी। इतना ही नहीं लालू प्रसाद की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी बड़ी इज्जत करते हैं। बिहार की राजनीति को समझने वाले कांग्रेस के एक नेता जी कहते हैं कि लालू यादव काफी बड़ी चीज हैं। उनके पास हमेशा एक कारगर राजनीति रहती है। इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है। इसलिए 2024 में विपक्षी दलों का वहां से मिलकर चुनाव लड़ना तय है। नीतीश के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना है कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं। साथ लड़ेंगे। यह तो राजनीति है जहां बयानबाजी चलती रहती है।
मध्यप्रदेश और राजस्थान में जीत के गणित में जुटी भाजपा
पांच राज्यों की चुनावी राजनीति में भाजपा जीत के लिए नए-नए समीकरण जोड़ने में लगी है। 13 नवंबर तक तक पार्टी के एजेंडे में मध्यप्रदेश नंबर वन पर है। 13 के बाद पूरा फोकस राजस्थान शिफ्ट हो जाएगा। ताकि 25 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले हर कसर पूरी हो जाए। बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों में माइक्रो मैनेजमेंट काफी बढ़ा दिया है। पार्टी ने इसी को ध्यान में रखकर प्रचार की रणनीति बनाई है। 6 नवंबर से इसमें भाजपा का आक्रामक प्रचार अभियान माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। शिवराज की छवि के साथ भाजपा खड़ी नजर आ रही है। ग्वालियर चंबल संभाग में ज्योतिरादित्य सिंधिया को महत्व दे रही है तो दूसरे क्षेत्रों में अन्य क्षत्रपों के बीच भी सस्पेंस बना रखा है। इसी तरह की योजना राजस्थान में भी है। नोएडा में रहने वाले भाजपा के एक बड़े नेता ने बताया कि 2018 में वसुंधरा और शिवराज दोनों के नेतृत्व में पार्टी चुनाव हार गई थी। 2020 में सरकार बनी तो ज्योतिरादित्य के कारण। उन्होंने बताया यह भाजपा ही है, जो लोकतांत्रिक पार्टी है। सबको अवसर देती है। पार्टी का हित सबसे ऊपर है।
यह सुनील कानूगोलू भी गजब की चीज हैं
कांग्रेस में सब ठीक नहीं चल रहा है। राहुल गांधी के एक चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार सुनील कानूगोलू गजब की चीज हैं। उनके बारे में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार अलग राय रखते हैं। शिवकुमार के करीबी कहते हैं कि कानूगोलू की कारगर रणनीति और अहम सुझावों ने पार्टी को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दिलाई, लेकिन डीके का नुकसान भी कर दिया। इसी तरह सुनील कानूगोलू ने पांच राज्यों के विधानसभा में भी अपनी राय दी है। चार राज्यों में तो सब ठीक है। लेकिन असली निशाना राजस्थान है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे दिल पर ले लिया है। गहलोत और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की खूब बनती है। लेकिन राहुल गांधी के अशोक गहलोत के समीकरण जरा कम बन पा रहे हैं। पिछले दिनों अशोक गहलोत ने सुनील कानूगोलू को खरी-खरी सुनाई थी। गोलू चाहते थे कि राजस्थान में चेहरे और टिकट बंटवारे में पार्टी उनकी राय मान ले। इसको लेकर अशोक गहलोत और राहुल गांधी के बीच में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को आना पड़ा था। फिलहाल अभी तो पूरा फोकस विधानसभा चुनाव पर है। चुनाव बाद गुलाबी नगरी जयपुर में राजनीति की कई पतंगे उड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजभर जी अभी थोड़ा इंतजार कीजिए
उत्तर प्रदेश में सुभासपा के नेता ओम प्रकाश राजभर की छटपटाहट बढ़ रही है। राजभर एनडीए के साथ आने पर अब ईनाम चाहते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके पक्ष में कम हैं। साथ लाने में भूमिका डिप्टी सीएम केशव मौर्य की भी थी। दारा सिंह चौहान की घर वापसी में भी राजभर थे। लेकिन दारा चुनाव हार गए। अब राजभर के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है। लिहाजा 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वह कुछ पा लेना चाहते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री भी चाहते हैं कि राजभर को कुछ ढंग का मिल जाए। पूरी कवायद यही है कि अन्य पिछड़ी जातियों को भाजपा के साथ बनाए रखना जरूरी है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनीति में तपकर कुंदन हो गए हैं। वह सोच विचार कर फैसला लेने लगे हैं। ऐसे में देखिए कब राजभर के लिए लखनऊ की गोमती नदी में पीने लायक जल प्रवाहित होता है।