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कांग्रेस ने जस्टिस ढींगरा पर सरकार से व्यक्तिगत लाभ लेने का लगाया आरोप

Fri, 01 Jul 2016 10:24 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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vadra dhingra
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हरियाणा में हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा सहित कुछ अन्य कंपनियों से जुड़े जमीन सौदे की जांच के लिए गठित जस्टिस ढींगरा आयोग पर सियासत चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस ने जस्टिस ढींगरा आयोग पर हरियाणा सरकार से व्यक्तिगत लाभ लेने का आरोप लगाया।
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पार्टी ने कहा कि एहसान से डरे जस्टिस ढींगरा सरकार की मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए पुरानी रिपोर्ट बदल रहे हैं। इस पर पलटवार करते हुए जस्टिस ढींगरा ने उन्हें जांच के लिए और समय लिए जाने से डर नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछा जाना चाहिए कि उन्हें डर तो नहीं लग रहा। बीच भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने वाड्रा पर जमीन घोटाले में घोर अनियमितता बरतने का आरोप लगाया। आयोग को और समय दिए जाने की वकालत करते हुए सोमैया ने कहा कि वाड्रा ने महज एक लाख रुपये में 58 करोड़ की जमीन हड़प ली थी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जस्टिस ढींगरा ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए खट्टर सरकार से अनुचित एहसान लिए। ऐसे में वह निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं। अनुचित एहसान तले दबे और डरे जस्टिस ढींगरा अब पुरानी की जगह सरकार के मनमाफिक नई रिपोर्ट तैयार करने में लगे। सुरजेवाला ने कहा कि ऐसा कर जस्टिस ढींगरा ने अपने पद से समझौता किया है। ऐसे में या तो सरकार को आयोग को ही भंग कर देना चाहिए या फिर जस्टि ढींगरा को इस्तीफा दे देना चाहिए। सुरजेवाला ने कहा कि ट्रस्ट पर किए गए सरकारी एहसान की जांच की जानी चाहिए।
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जस्टिस ढींगरा बोले हुड्डा से पूछिये, डर तो नहीं लगता

जस्टिस ढींगरा
कांग्रेस के आरोपों पर जस्टिस ढींगरा ने संक्षिप्त लेकिन कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें जांच के लिए कुछ और समय लेने में कोई भय नहीं है। यह तो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा से पूछा जाना चाहिए कि कहीं उन्हें तो डर नहीं लग रहा। इससे पहले जस्टिस ढींगरा ने राजनीतिज्ञ और निजी कंपनियों को तलब न किए जाने के संदर्भ में कहा था कि आयोग ने सरकारी अधिकारियों को तलब किया था जबकि राजनीतिज्ञों और निजी कंपनी से जुड़े लोगों से लिखित सवाल पूछे थे।
 
इधर भाजपा ने इस मामले में कांग्रेस और वाड्रा के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। सांसद सोमैया ने ट्वीट कर कुछ दस्तावेज जारी किए और वाड्रा की कंपनी स्काइ्रलाइल हॉस्पिटेलिटी को हुड्डा सरकार द्वारा अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। सोमैया ने कहा कि हुड्डा कार्यकाल में वाड्रा की कंपनी ने खुली लूट की। कंपनी को 58 करोड़ रुपये की जमीन महज एक लाख रुपये में उपलब्ध करा दी गई। 

सरकार ने नहीं ग्रामीण ने दान की थी जमीन

जस्टिस ढींगरा से जुड़े जिस जस्टिस गोपाल सिंह पब्लिक चैरिटेलबल ट्रस्ट पर खट्टर सरकार की मेहरबानी के आरोप लग रहे हैं, उसे सरकार ने नहीं बल्कि एक ग्रामीण ने 2235 गज जमीन पिछले साल नवंबर में दान में दी थी। जस्टिस ढींगरा के करीबी का कहना था कि गुड़गांव के जौरी खुर्द इलाके में स्कूल खोलने की योजना बनी थी।

जस्टिस ढींगरा ने इस स्कूल में छोटे बच्चों की सुविधा के लिए कच्ची सड़क को पक्की बनाने के लिए गुड़गांव के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने आसपास के छोटे बच्चों के संबंधित स्कूल में पढने का हवाला दिया था। इसके बाद इस सड़क के लिए 95 लाख रुपये मंजूर किए गए।
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वाड्रा को ईडी का एक और नोटिस

- फोटो : file photo
जस्टिस ढींगरा आयोग पर जारी सियासत के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के खिलाफ एक बार फिर से नोटिस भेजा है। ईडी ने वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी को नोटिस जारी कर बैंक अकाउंट सहित कई अन्य वित्तीय जानकारियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि बीकानेर (राजस्थान) में कंपनी से जुड़े जमीन सौदा मामले में ईडी पहले भी नोटिस भेज कर वाड्रा को पेश होने केलिए कहा था। ईडी के सूत्रों का कहना था कि इस मामले में न तो वाड्रा पेश हुए और न ही अपने वकील के माध्यम से उचित जानकारी ही मुहैया करा पाए। माना जा रहा है कि ईडी के वर्तमान रुख से वाड्रा की मुसीबत बढ़ेगी। 

बीकानेर में वाड्रा की कंपनी द्वारा खरीदी गई 275 बीघा जमीन मामले में ईडी पहले ही मनी लाउंड्रिंग केतहत मामला दर्ज कर चुका है। ईडी सूत्रों का कहना है कि यह नई फर्म है और इसका नाम भी पुरानी फर्म की तरह ही स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी है। हालांकि दोनों कंपनी के कार्यप्रणाली में अंतर है। ऐसे में अब वाड्रा से सभी तरह के वित्तीय लेन देन की जानकारी मांगने के लिए नया नोटिस जारी किया गया है। 
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