मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते कांग्रेस के नेता (फाइल फोटो)
मोदी सरकार के खिलाफ वाईएसआर के अविश्वास प्रस्ताव ने कांग्रेस की दुविधा बढ़ा दी है। उसे पता है कि इस प्रस्ताव का समर्थन करने के बाद पीएनबी घोटाला मुद्दा दब जाएगा। इसके अलावा समय से पहले भाजपा को पता चल जाएगा कि किस दल का भविष्य में रुख किस प्रकार का हो सकता है।
कांग्रेस की चिंता का दूसरा पहलू विपक्षी एकता से जुड़ा है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम में जुटी है। ऐसे में इस प्रस्ताव से किनारा करने का भी उसे नुकसान उठाना होगा। ऐसे में अगर वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी के साथ कुछ और दल आ गए तो कांग्रेस प्रस्ताव का समर्थन करने पर मजबूर हो जाएगी।
समर्थन जुटाने में लगी वाईएसआर
अविश्वास प्रस्ताव के लिए समर्थन हासिल करने के क्रम में वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों ने बृहस्पतिवार को अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को अपने पार्टी अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी का पत्र सौंपा। इस पत्र में आंध्र प्रदेश के खिलाफ कथित अन्याय पर साथ देने की अपील करते हुए कहा गया है कि अगर विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला तो पार्टी के सांसद सत्र के अंतिम दिन सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे।
मामला सीधे सीधे आंध्र प्रदेश की राजनीति से जुड़ा होने के कारण जहां टीडीपी प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए तैयार हो गई है, मगर कांग्रेस, टीएमसी सहित अन्य विपक्षी दल ऊहापोह में हैं। यह दल तय नहीं कर पा रहे हैं कि एक क्षेत्रीय मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया जाए या नहीं। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को अंतिम निर्णय लेंगे।