चीफ जस्टिस पर रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिलाकर्मी ने आंतरिक जांच समिति के निर्णय पर नाराजगी जताई है। महिला ने कहा है कि आंतरिक जांच समिति का इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि आरोपों में कोई दम नहीं है, इससे वह आहत है और यह निर्णय दिल को चोट पहुंचाने वाला है।
महिला ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। तमाम तथ्यों व प्रमाणों को प्रस्तुत करने के बावजूद जांच समिति ने आरोपों को निराधार करार दे दिया। महिला ने कहा है कि उसके साथ घोर अन्याय हुआ है।
महिला ने कहा कि उसे शुरुआत से ही इस बात की आशंका थी कि जिस तरह से कार्यवाही चल रही है उसे न्याय मिलने की आशंका कम है। आंतरिक जांच समिति के निर्णय के बाद अब यह साफ हो गया है कि मेरा अंदेशा सही था। शीर्ष अदालत से न्याय मिलने की मेरी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
उसने यह भी कहा कि पैनल ने यह भी कहा है कि उसे रिपोर्ट की प्रति नहीं दी जाएगी। ऐसे में उसे कैसे पता चलेगा कि किन वजहों से उसकी शिकायतों को खारिज कर दिया गया। महिला का यह भी कहना कि उसे कोई संरक्षण नहीं दिया गया। उसका परिवार खतरे में है। महिला ने कहा कि वह अपने वकील से मिलकर आगे की रणनीति तय करेगी।