नोटबंदी और जीएसटी केंद्र सरकार के ऐसे दो फैसले रहे हैं जिनके बाद माना जाता है कि व्यापारी समुदाय सरकार से बेहद नाराज था। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन फैसलों की वजह से देश के सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट आई, व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई और व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन केंद्र सरकार अब देश के व्यापारियों से सीधे संवाद स्थापित कर इन मामलों पर अपना पक्ष रखेगी और व्यापारियों के मन की बात जानने की कोशिश करेगी।
जानकारी के मुताबिक केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु अगले सोमवार यानी 18 फरवरी को ऑन लाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए देश भर के व्यापारियों से बात करेंगे। इसके लिए देश भर में 37 केंद्रों पर कार्यक्रम से जुड़ने की व्यवस्था की गई है। इस कार्यक्रम को सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित भी किया जाएगा।
सरकार के इस निर्णय से खुश हुआ व्यापार जगत
देश के खुदरा बाजार में लगभग 13 करोड़ छोटे दुकानदार और छोटे-मंझोले व्यापारी लगे हुए हैं। इस बाजार के माध्यम से देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। लेकिन बढ़ते ऑन लाइन बाजार के कारण खुदरा बाजार बेहद मुश्किल में नजर आ रहा था। ऑन लाइन मार्केट में ग्राहकों को मिल रही भारी छूट उन्हें अपनी तरफ खींच रही थी जिसका सीधा नुकसान खुदरा व्यापारियों को उठाना पड़ रहा था।
लेकिन सरकार ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए एक फरवरी से ऑन लाइन व्यापार से जुड़े कई ऐसे नियम बना दिये जिसके कारण ऑनलाइन कंपनियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। अमेजन को अपनी ऑनलाइन लिस्टिंग से भारी मात्रा में सामान को हटाना पड़ा है। व्यापारियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। व्यापारियों की मांग है कि इस नियम को बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ही सीमित न रखकर, घरेलू ऑनलाइन कंपनियों पर भी लागू करना चाहिए। क्योंकि ऐसा न करने पर विदेशी कंपनियां देशी कंपनियों से टाइअप करके पिछले दरवाजे से प्रवेश कर सकती हैं और घरेलू बाजार के लिए एक बार फिर खतरा बन सकती हैं।