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यूजीसी हुआ सख्त, अब जाति-धर्म-रंग और क्षेत्र पर टिप्पणी का माना जाएगा रैगिंग

Sun, 17 Jul 2016 03:25 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
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रैगिंग पर सख्त यूजीसी
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उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नियमों को और सख्त कर दिया है। इसके अलावा रैगिंग का दायरा भी बढ़ा दिया है। यूजीसी की ओर से रैगिंग अपराध निषेध विनियम में एक क्लाज और जोड़ा गया है।
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पिछले महीने की 29 तारीख को इसकी अधिसूचना जारी होने के साथ ही नया प्रावधान लागू भी हो गया है। इसके अंतर्गत जाति-धर्म-रंग-क्षेत्र आदि के नाम पर धमकाना, भेदभाव आदि को भी रैगिंग के दायरे में शामिल किया गया है।

जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद आदि राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों में क्षेत्र और जाति के नाम पर भेदभाव, मारपीट के लगातार शिकायतें होती रही हैं। जम्मू-कश्मीर के तकनीकी संस्थान में नवप्रवेशी विद्यार्थियों को वहां के छात्रों ने बंधक बना लिया था। सरकार के हस्तक्षेप के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका था।
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विद्यार्थियों को छोड़नी पड़ती है पढ़ाई

रैगिंग
इस तरह की कई अन्य शिकायतें भी हैं। इसकी वजह से कई विद्यार्थियों को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। कई ने तो आत्महत्या जैसे कदम उठा लिए। इन घटनाओं के मद्देनजर रैगिंग के नियमों को सख्त किया गया है। यूजीसी के विनियम ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग अपराध निषेध-2009’ के पैरा तीन में रैगिंग को परिभाषित किया गया है।

इसमें एक और क्लाज और जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत किसी छात्र-छात्रा को जाति, धर्म, स्थान, लिंग, उसके रूप, भाषा आदि के आधार पर संबोधित करना रैगिंग के दायरे में आएग। इतना ही नहीं यदि किसी को आर्थिक आधार पर परेशान या प्रताड़ित किया जाता है तो भी दोष सिद्ध होने पर आरोपी के खिलाफ इसी अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई होगी।

सचिव प्रोफेसर जसपाल एस.संधू की ओर से यह संशोधन यूजीसी की वेबसाइट पर भी अपलोड कद दिया गया है। साथ में सभी विश्वविद्यालयों को भेजकर इसके पालन के लिए कहा गया है।
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