वेस्टर्न कमांड की ओर से मेरठ छावनी से पकड़े गए जासूस से प्रारंभिक पूछताछ में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का एक अफसर, जो भारतीय जवान का हैंडलर था, भारतीय सेना का नकली अफसर कर्नल शर्मा बनकर सिगनल रेजिमेंट के जवान कंचन से जासूसी करवाता था।
इस फर्जी कर्नल शर्मा ने महीनों पहले कंचन को अपने प्रभाव में लिया था। जासूसी कांड में फंसा जवान कंचन सिंह भी बिना किसी जांच पड़ताल के यह मानकर चल रहा था कि वह भारतीय सेना के एक कर्नल रैंक के अफसर के संपर्क में हैं, उसके लिए हर जानकारी जुटाकर देता रहा। इसी के चलते कई संवेदनशील सैन्य यूनिटों की जानकारियां पाकिस्तान पहुंच गईं।
सैन्य सूत्रों के अनुसार फर्जी कर्नल शर्मा सिगनल रेजिमेंट के इस जवान को व्हॉट्सएप पर टास्क भेजता था। इस टास्क में आर्मी कमांडरों की तैनाती, तबादले, उनके नाम व यूनिटों की तैनाती व डिप्लॉयमेंट संबंधी सूचनाओं के साथ-साथ सेना की संवेदनशील और अति महत्वपूर्ण मिसाइल लैस यूनिटों एवं रेजिमेंट की लोकेशन और नफरी तक की जानकारी मांगी जाती थी। आर्मी के टेलीफोन एक्सचेंज में तैनात आरोपी जवान के लिए इन जानकारियों को जुटाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं था। वह संबंधित टास्क को पूरा कर तमाम जानकारियां फर्जी कर्नल शर्मा को व्हॉटसएप पर ही भेज देता था।
इंडियन नेटवर्क को हाईजैक कर पाकिस्तान से आती थी कॉलफर्जी कर्नल शर्मा आरोपी जवान से व्हॉटसएप चैटिंग व कॉल के जरिए संपर्क करता था। हैरत की बात यह कि इस व्हॉटसएप कॉलिंग के लिए इंडियन नेटवर्क को हाईजैक किया जाता था और फिर जवान से संपर्क होता था। जांच में खुलासा हुआ कि इंडियन नेटवर्क से आनी वाली कॉल दरअसल पाकिस्तानी नंबर से होती थी और पाकिस्तान से ही की जाती थी।
कुछ और लोगों की हो सकती है गिरफ्तारी
इस मामले में भारतीय सेना की विशेष टीम ने फिलहाल प्रारंभिक जांच पूरी की है। लेकिन इस जांच में कई और लोग भी टीम के राडार में आ गए हैं। ये वो लोग है, जो आरोपी जवान कंचन सिंह के संपर्क में थे और कंचन सिंह को सूचनाएं उपलब्ध करवाते थे। सैन्य अफसर को शक है कि ये लोग भी कई आईएसआई के संपर्क में तो नहीं है। लिहाजा निकट भविष्य में कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती है।