सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से बहस के लिए विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) का नाम तय करने के लिए 10 फरवरी तक का समय दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा की याचिका पर विचार कर रही है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अभियोजक के पद से मुक्त होना चाहते हैं। शीर्ष न्यायालय ने चीमा को 2014 में कोयला खदान घोटाले मामलों में विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त किया था।
पीठ केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस सुझाव से सहमत नहीं हुई कि पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह को कोयला घोटाला मामलों से जुड़े ईडी के मामलों में मुकदमे चलाने के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त किया जाए। पीठ ने कहा कि हमें निचली अदालत का वकील चाहिए जो मुकदमें चलाता रहा हो। पीठ ने कहा कि चीमा द्वारा सुझाए गए अन्य वकील का नाम अधिक उपयुक्त लगता है।
न्यायालय ने कहा कि पीठ इस संबंध में फिर सुनवाई नहीं करेगी। चीमा ने कहा था कि वह कोयला घोटाला मामलों में सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक बने रहना चाहेंगे, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों में एसपीपी नहीं रहना चाहते क्योंकि ऐसे मामलों में उनकी मदद करने के लिए विधि अधिकारियों की कमी है।
सुप्रीम कोर्ट ने नौ दिसंबर को सॉलिसिटर जनरल और चीमा से उस वकील का नाम बताने के लिए कहा था जिसे ईडी के मामलों के लिए एसपीपी नियुक्त किया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय ने पहले सीबीआई और ईडी से कोयला खदान आवंटन घोटाले के मामलों में जांच तथा मुकदमे की स्थिति के बारे में पूछा था।