लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कल संसद में उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बात की और रात में उन पर सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) लगाया गया। आप इस तरह से कश्मीर पर शासन नहीं कर सकते। ऐसे में कश्मीर भौगोलिक रूप से हमारे साथ है लेकिन भावनात्मक रूप से नहीं।
राहुल के बयान पर हंगामा
राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए आपत्तिजनक बयान पर संसद में जोरदार हंगामा हुआ। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सदन में ये मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी की निंदा की जिसपर सदन में हंगामा मच गया। पक्ष और विपक्ष के कुछ सदस्यों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आसन के सामने पहुंचकर नारेबाजी की। इसके बाद स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही एक बजे तक स्थगित कर दी।
जानिए कैसे बढ़ा हंगामा, क्या हुआ संसद में
लोकसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान उस समय हंगामेदार स्थिति बन गई जब स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक प्रश्न का उत्तर देने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में राहुल गांधी के एक बयान की आलोचना शुरू कर दी । इस पर कांग्रेस के एक सदस्य हंगामा करते हुए सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति तक पहुंच गए।
प्रश्नकाल के दौरान बिरला ने राहुल गांधी को चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना से संबंधित उनका पूरक प्रश्न पूछने के लिए कहा। हर्षवर्धन ने कहा कि राहुल गांधी के प्रश्न का उत्तर देने से पहले मैं प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उनके एक बयान का उल्लेख करना चाहूंगा और उसकी निंदा करना चाहूंगा जिसमें उन्होंने कहा था कि छह महीने बाद देश के युवा प्रधानमंत्री को डंडे मारेंगे।
इसी दौरान कांग्रेस के सदस्य जोरदार तरीके से विरोध दर्ज कराने लगे और पार्टी सदस्य मणिकम टैगोर सत्ता पक्ष की अग्रिम पंक्ति के पास पहुंच गए और दूसरी पंक्ति में जवाब दे रहे हर्षवर्धन के ठीक सामने पहुंचकर हाथ दिखाकर विरोध जताने लगे।
तमिलनाडु से कांग्रेस सदस्य टैगोर, हर्षवर्धन के बिल्कुल सामने पहुंच गए थे जिन्हें रोकने के लिए कई मंत्री और भाजपा सांसद आगे आ गए। टैगोर के पीछे-पीछे केरल से कांग्रेस सदस्य हिबी इडेन भी सत्तापक्ष की ओर पहुंच गए।
इस दौरान संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी सहित कई मंत्री और भाजपा सदस्य उन्हें रोकने के लिए पहुंच गए। भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने सबसे पहले पहुंचकर टैगोर को रोकने का प्रयास किया और वह उनसे नाराजगी में कुछ कहते भी दिखे।
इस दौरान हंगामे की स्थिति बन गई और अध्यक्ष बिरला ने करीब 11:50 बजे सदन की बैठक दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी।