फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bengal: अल्पसंख्यक बनाम दलित के संग्राम में फंसीं सीएम ममता, छह मार्च को पीएम करेंगे महिला सम्मेलन को संबोधित

Fri, 23 Feb 2024 06:12 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, पश्चिम बंगाल में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और अब मीडियाकर्मी भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। संदेशखाली में जिस तरह से पत्रकार को गिरफ्तार कर रोका गया, वह निंदनीय है।
विज्ञापन
PM Modi, Mamata Banerjee - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कभी टीएमसी प्रमुख ममता ने नंदीग्राम किसान आंदोलन को सियासी हथियार बना कर राज्य में तीन दशक से भी अधिक पुराने वाम दलों के शासन का अंत किया था। अब भाजपा की योजना संदेशखाली को राज्य का दूसरा नंदीग्राम बना कर राज्य में टीएमसी के शासन को कमजोर करने की है। संदेशखाली में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की शिकार होने वाली महिलाएं दलित बिरादरी की हैं, जिनकी आबादी राज्य की आबादी की एक चौथाई है। इस मामलें में अदालत का सुर बेहद तल्ख है। मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग अपनी-अपनी टीमें यहां भेज चुकी हैं।

अदालत के तल्ख सुर और विभिन्न आयोगों की सक्रियता के बाद इस मामले में कुछ टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी हुई है, हालांकि मामले का मुख्य अभियुक्त शाहजहां शेख अब भी फरार है। इसी बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 मार्च को संदेशखाली के करीब एक महिला सम्मेलन को संबोधित करने वाले हैं।

पीएम के कार्यक्रम से बढ़ेगी हलचल

विज्ञापन

राज्य में संदेशखाली की घटना को ले कर बीते एक पखवाड़े से राजनीति गर्म है। यहां टीएमसी कार्यकर्ताओं की शिकार दलित बिरादरी की महिलाएं हुई हैं। यही कारण है कि पीएम की रैली उत्तर 24 परगना स्थित संदेशखाली के पास में रखी गई है। जाहिर तौर पर चूंकि महिला सम्मेलन है, ऐसे में पीएम मोदी महिला सशक्तिकरण से संबंधित अपनी सरकार की दस साल की उपलब्धियां गिनाते हुए संदेशखाली की घटना का भी जिक्र करेंगे। सीएम की मुश्किल बड़ी क्यों? : राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी की हिस्सेदारी 28 फीसदी है। तीन दशक से अधिक शासन में रहने वाले वाम दलों ने भी राज्य में मुस्लिम केंद्रित राजनीति की। सत्ता बरकरार रखने के लिए ममता बनर्जी ने भी राजनीति का वही मॉडल अपनाया है। इस बार समस्या यह है कि संदेशखाली में उत्पीड़न की शिकार महिलाएं दलित बिरादरी से हैं, जिनकी आबादी में हिस्सेदारी मुसलमानों के बराबर करीब एक चौथाई है।

बैकफुट पर बंगाल सरकार
संदेशखाली की घटना को पहले ममता सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। जो महिलाएं उत्पीडऩ, यौन हिंसा की शिकार हुईं, उसका संज्ञान नहीं लिया गया। भाजपा का आरोप है कि इसलिए इस घटना के प्रति संवेदनशीलता नहीं बरती गई कि यौन हिंसा के आरोपी न सिर्फ टीएमसी के कार्यकर्ता हैं, बल्कि अल्पसंख्यक बिरादरी के हैं। हालांकि अदालत के तल्ख रुख के बाद ममता सरकार इस घटना के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बाध्य हुई है।

बंगाल में महिलाएं और मीडियाकर्मी असुरक्षित

विज्ञापन

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, पश्चिम बंगाल में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और अब मीडियाकर्मी भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। संदेशखाली में जिस तरह से पत्रकार को गिरफ्तार कर रोका गया, वह निंदनीय है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें