अगर पहली और प्रारंभिक जांच में पॉजिटिव सैंपल आता है तो उसे फिर जांच करने के लिए ’नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ पुणे में भेजा जाता है क्योंकि इसी सेंटर को,’विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने हमारे देश में अपना एक विश्वासी और सटीक सेंटर माना है और वो सेंटर जब भेजे सैंपल को पॉजिटिव होने की पुष्टि करता है तभी पॉजिटिव रिपोर्ट मनी जाती है, नेगेटिव सैंपल के लिए जांच का सैंपल पुणे भेजा जाएगा की नहीं इसके बारे में आईसीएमआर ने कोई निर्देश नहीं दिए हैं। जिस तरह से रोग बढ़ रहा है इसलिए भारत सरकार ने कई सारी सरकारी और गैर सरकारी लौबो को भी मंजूरी दी है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद या आईसीएमआर जो कि भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग का एक विशिष्ट विभाग है और सभी तरह के मेडिकल रिसर्च के लिए सबसे सर्वोत्तम संस्थान है,और स्वास्थ्य मंत्रालय केअधीन को पूरे देश में किसी भी संक्रमण को नियंत्रण करने वाला शीर्ष संस्थान है,उसने एक कोरोना टास्क फोर्स बनाया है। अपनी वेबसाइट पर बताया है कि लगभग 119 सरकारी लैब भारत के विभिन्न प्रांतों में स्थापित किए गए हैं।
इसमें से 14 लैब अभी तक पूरी तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि इनमें इनको टेस्ट करने के जो किट है वह ठीक से नहीं पहुंच पाई है। भारत सरकार ने 22 जगह पर कई गैर सरकारी लौबों को भी अनुमति प्रदान की है यह लैब पैसा लेकर रोगी की जांच कर सकेंगे। भारत सरकार ने यह भी कहा है कि यह प्राइवेट लैब किसी से भी 4500 रुपया से ज्यादा नहीं ले सकते हैं और भारत सरकार के कोरोना टास्क फोर्स ने सभी से अपील की है कि ये लैब इससे भी कम पैसा ले और अगर मुफ्त में कर सके तो बहुत बढ़िया।
भारत सरकार ने कहा है कि लैब के स्तर पर जांच करने के लिए शुरुआत में 1500 रुपए लिए जाएं और जब प्रारंभिक जांच में कोरोना की पुष्टि हो जाए तो उनसे बाकी के तीन हजार रुपये लिए जाए। परंतु देखना होगा कि प्राइवेट लैब निर्धारित शुल्क से ज्यादा न लें और और उनकी जांच की प्रामाणिकता भी बनी रहे। लोगों में कोरोना को लेकर फैले डर को निजी लैब वाले कहीं मुनाफा कमाने का जरिया न बना लें इसके लिए और सरकार को इनपर नजर भी रखनी पड़ेगी।
दिल्ली में इस वायरस की जांच मुफ्त में ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, एनआईसीडी दिल्ली, आईएलबीएस वसंत कुंज, आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एवं रेफरल सेंटर में है। दिल्ली से जुड़े हरियाणा में यह रोहतक के मेडिकल कॉलेज में हो रहा है। दिल्ली से जुड़े यूपी में यह लखनऊ के केजीएमसी, संजय गांधी इंस्टीट्यूट, बीएचयू,गोरखपुर मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज, कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में हो रही है। जहां तक प्राइवेट लैब का सवाल है दिल्ली में यह लाल पैथोलॉजी, डॉ. डांग पैथोलॉजी, अपोलो सरिता विहार हॉस्पिटल की पैथोलॉजी तथा मैक्स हॉस्पिटल साकेत की पैथोलॉजी सेंटर में हो रहा है।
यह बात जानना इसलिए बेहद जरूरी है कि साधारण रोगी यह नहीं समझे की लाल पैथोलॉजी या डॉ. डांग पैथोलॉजी या फिर अपोलो हॉस्पिटल के किसी भी सेंटर या फिर मैक्स हॉस्पिटल के किसी भी सेंटर पर यह जांच हो सकती है। कोई भी रोगी खुद जाकर पैसे देकर यह जांच नहीं करा सकता है इसके लिए उसको एक अच्छे डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा और जब डॉक्टर उचित समझेंगे तभी कोई भी व्यक्ति अपनी जांच करा सकता है।
व्यक्ति को अपनी जांच के साथ अपना मोबाइल नंबर, अपना सरकार के द्वारा दिया गया आईडी कार्ड जैसे ड्राइविंग लाइसेंस या आधार कार्ड या वोटर कार्ड या फिर पासपोर्ट की कॉपी देनी पड़ेगी, रोगी को अपना पूरा पता भी देना पड़ेगा जिससे स्वास्थ्य कर्मचारी उन से बराबर संपर्क कर सकें और जैसे ही उनको पॉजिटिव आए तो उनको घर में अकेले सुरक्षित रहने के लिए कहा जाए और उनके साथ में जो भी व्यक्ति हैं उनको उनसे 6 फीट दूर रहने को कहा जाए और वह व्यक्ति हर समय मुंह पर मास्क लगाए और चश्मा पहने। ऐसे रोगियों को हर कुछ मिनट के बाद हाथ धोना चाहिए या तो सैनिटाइजर के साथ जिसमें 60 परसेंट अल्कोहल या फिर एक बर्तन में लगभग आधा लीटर पानी लेकर उसमें एक माचिस की डिब्बी के बराबर ब्लीचिंग पाउडर लेकर एक मिश्रण बनाएं और उससे हाथ धोए या फिर साबुन से हाथ धोए।
आईसीएमआर को चाहिए अपने सारे आंकड़े पूरी पारदर्शिता से सार्वजनिक करता रहे जिससे लोगों में किसी तरह का भ्रम न फैले। हरियाणा में गुड़गांव में स्टैंडर्ड लाइफ साइंस सेक्टर 34 गुरुग्राम और एसआरएल लैबोरेट्री को 18 सेक्टर गुरुग्राम में प्राइवेट लैब के रूप में मंजूरी मिली है परंतु यह सैंपल सिर्फ अपनी ही जगह पर ले सकेंगे। यूपी में कोई भी प्राइवेट लैब को मंजूरी नहीं मिली है। महाराष्ट्र में थायरोकेयर मेट्रोपोलिस को जांच करने की सुविधा मिली है मगर वह सिर्फ अपने मुंबई सेंटर में ही इसकी जांच कर सकेंगे या सैंपल ग्रहण कर सकेंगे।
यह दिल्ली या यूपी के किसी भी या हरियाणा के किसी भी जगह से सैंपल लेकर उसकी जांच को नहीं कर सकेंगे। इसलिए लोग भ्रमित ना हो और ना ही इन सेंटरों ने जो लगभग 15 हजार सब सेंटर खोले हुए हैं,उनमें अपने सैंपल दें। और अगर कोई भी लैब अगर ऐसा कर रहा है तो तुरंत सरकार को सूचित करें सरकार ने एक नंबर टोल फ्री नंबर 01123978046 दिया है, लेकिन आम तौर पर यह नंबर उठता नहीं है और सिर्फ एक नंबर ही काफी नहीं है। सरकार ने दो ईमेल आईडी भी दी है परंतु उनमें भी ईमेल करने पर कोई जवाब नहीं मिलता।
इसलिए सरकार को चाहिए कि जबकि पूरी जनता,लोक डाउन में बंद है तो कई सारे नंबर दें और लोगों को अपने प्रश्नों का उत्तर दें तथा उनको सही रास्ता बताएं क्योंकि आम जनता में प्रधानमंत्री के घोषणा के बाद बहुत ज्यादा भय और भ्रम है।इसे फौरन दूर किया जाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि कोरोना की जांच में वही किट उपयोग में लाई जाए जो कि सौ प्रतिशत सही मायने में नेगेटिव या पॉजिटिव मामलों की जांच करें नहीं तो जनता में बहुत ज्यादा नासमझी फैल जाएगी और विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हमारे सभी जांचो को शक के दायरे में रखेगा और हमारे आंकड़े गलत मान लिए जाएंगे।