जलवायु परिवर्तन से अंगूर की बनावट, पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के कारण सदी के अंत तक दुनिया में अंगूर उत्पादन के लिए उपयुक्त 70 फीसदी क्षेत्र बहुत अधिक गर्म हो जाएंगे। इसका असर अंगूर और वाइन के उत्पादन तथा उनकी गुणवत्ता पर पड़ेगा।
250 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों का विश्लेषण
जर्नल नेचर रिव्यु अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जिस तरह जलवायु में आ रहे बदलावों से अंगूर की पैदावार पर असर पड़ रहा है, उससे आने वाले दशकों में वाइन उत्पादक क्षेत्रों पर गंभीर असर पड़ेगा। शोधकर्ताओं ने पिछले दो दशकों में प्रकाशित 250 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों का विश्लेषण किया है। इसके आधार पर उन्होंने मौजूदा और उभरते वाइन उत्पादक क्षेत्रों पर मंडराते जलवायु परिवर्तन के खतरे और संभावित लाभों को रेखांकित करते हुए एक वैश्विक मानचित्र भी बनाया है। उन्होंने इस बात का भी अध्ययन किया है कि तापमान, बारिश, आर्द्रता, विकिरण और कार्बन डाइऑक्साइड पर पड़ते प्रभाव वाइन उत्पादन को कैसे प्रभावित कर रहा है।
इन क्षेत्रों पर असर
शोध के अनुसार, वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ इसका सबसे ज्यादा खामियाजा दुनिया के 90 फीसदी पारंपरिक वाइन उत्पादक क्षेत्रों को उठाना पड़ेगा। यह क्षेत्र यूरोप से दक्षिणी कैलिफोर्निया तक फैले हैं। इनमें स्पेन, इटली, ग्रीस और दक्षिणी कैलिफोर्निया के तटीय और तराई क्षेत्र भी शामिल हैं जो अपने वाइन उत्पादन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। ठंडी जलवायु में ताजी, शानदार वाइन का उत्पादन होता है, क्योंकि कम तापमान अम्लता को बनाए रखता है।
बदलाव का असर वाइन के रंग-रूप पर पड़ रहा
गर्म तापमान अंगूर के बढ़ने के चक्र को तेज कर देता है। इससे इसके पकने की अवधि गर्मियों के गर्म हिस्से में चली जाती है। यही वजह है कि दुनिया के कई वाइन क्षेत्रों में 40 साल पहले की तुलना में अब अंगूर की फसल दो से तीन सप्ताह पहले ही तैयार हो रही है। अंगूर की परिपक्वता में आया यह बदलाव वाइन की गुणवत्ता और उसके रंग-रूप को प्रभावित कर रहा है। वाइन की कीमत काफी हद तक उसकी गुणवत्ता पर निर्भर है जो तीन से 1,000 डॉलर प्रति बोतल के बीच होती है।