पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलने और उनके आश्वासनों के बावजूद मैं गंगा की बदहाली और इसे सुधारने की कोशिशों के हश्र को देखकर बहुत उत्साहित नहीं था। लेकिन एक खास घटना ने मुझे गंगा की सफाई को लेकर सकारात्मक होने पर मजबूर कर दिया। इसकी शुरुआत होती है वर्ल्ड वाइड फंड की ओर से गंगा में डॉल्फीन देखने के आमंत्रण के साथ। इस असधारण जंतु पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
1980 के दशक में भारत में इसकी संख्या 5000 तक गिनी गई थी लेकिन डब्लूडब्लूएफ के हाल के सर्वे में इसकी संख्या 2000 से भी कम बची हुई पाई गई है। जब मैंने दिल्ली में अपने एक पत्रकार मित्र के साथ डॉल्फिन देखने की इच्छा जाहिर की तो उसने कहा कि डाल्फिन मुश्किल से दिखती है। उसने बताया कि गंगा की डॉल्फिन समुद्री डाल्फिनों की तरह उछलने-कूदने वाली नहीं होती है। तुम अगर उनकी पीठ से ज्यादा कुछ देख पाओ तो किस्मतवाले होगे। डाल्फिन देखने की मेरी उम्मीद करीब-करीब धाराशायी हो गई थी और मैं डब्लूडब्लूएफ की ओर से आगे की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहा था। मैं उम्मीद कर रहा था कि डॉल्फिन देखने के लिए मुझे उन ऊंचाई वाले इलाकों में जाना होगा जहां गंगा का पानी साफ होता है लेकिन उन्होंने मुझे इलाहाबाद आने को कहा।
यह शहर उन शहरों में है जहां गंगा का पानी सबसे गंदा है। मैं अपने कैमरा टीम के साथ एक छोटे से गांव में पहुंचा। हमें 10 बजे सुबह गंगा किनारे पहुंचने को कहा गया क्योंकि डॉल्फिन सुबह के वक्त ज्यादा सक्रिय रहती है। मैं लंबे वक्त तक इंतजार करने की पूरी तैयारी कर के गया था। लेकिन जैसे ही मैं गंगा के किनारे रेत पर पहुंचा मैंने देखा कि कोई चीज सतह पर आकर टकरा रही है। मैंने भौंचक्का होकर पूछा, "क्या ये डॉल्फिन थी?" डब्लूडब्लूएफ के असगर नवाब ने मुझसे कहा हां, ये डॉल्फिन ही थी।
उन्होंने मुझे बताया कि हर एक-दो मिनट पर डॉल्फिन को सांस लेने की जरूरत पड़ती है इसलिए वे लगातार सतह के किनारे आती रहती हैं। डॉल्फिन को देखना और उसकी तस्वीर ले पाना बिल्कुल जुदा बातें हैं। लेकिन किस्मत से बीबीसी के होनहार कैमरामैन संजय गांगुली मेरे साथ थे। मैं उस लम्हें को कभी नहीं भूलूंगा जब एक साथ सात डॉल्फिन मेरे नाव के नजदीक एक के बाद एक करके कूद रही थीं। दो घंटे के बाद हमारे पास इस अद्भुत जंतु के कुछ जबरदस्त तस्वीरें मौजूद थीं। लेकिन इसके बाद मुझे लगा कि प्रदूषण के बावजूद भी गंगा इन अद्भुत जंतुओं को जिंदा रख सकती है और मैं एक बार फिर इस बात के महत्व को समझ पाया कि क्यों गंगा नदी को साफ करने की भारत सरकार की कोशिशें सफल होनी चाहिए।