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कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी वर्ष को लेकर भिड़े माकपा और भाकपा

Sun, 08 Dec 2019 02:54 AM IST
गौरव पाण्डेय शरद गुप्ता, नई दिल्ली

सार

  • माकपा ने शुरू की स्थापना शताब्दी वर्ष मनाने की तैयारियां, भाकपा 2025 में मनाएगी
  • 1964 में दो धड़ों में बंटी थी पार्टी, पहले 26 दिसंबर 1925 को मानते थे स्थापना दिवस
  • माकपा का कहना है कि ताशकंद में 17 अक्टूबर 1920 को पार्टी की नींव रखी गई थी
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भाकपा-माकपा
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विस्तार
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कम्युनिस्ट पार्टी के स्थापना के शताब्दी वर्ष को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) आपस में भिड़ गए हैं। एक ओर माकपा ने स्थापना शताब्दी वर्ष मनाने की तैयारी शुरू कर दी हैं, वहीं भाकपा 2025 में मनाएगी। कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों धड़े काफी समय तक एक थे, लेकिन 1964 में उनके रास्ते अलग हो गए। तब तक दोनों धड़े 26 दिसंबर 1925 को स्थापना दिवस मानते थे क्योंकि इसी तारीख को कम्युनिस्ट पार्टी ने कानपुर में अपनी पहली कांग्रेस (शिखर बैठक) आयोजित की थी। इसी बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था।

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माकपा ने कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना का वर्ष 1920 माना है। उसका कहना है कि ताशकंद में 17 अक्टूबर 1920 को पार्टी की नींव रखी गई। पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी के मुताबिक, अक्तूबर 1920 को ताशकंद में कुछ प्रमुख क्रांतिकारी नेताओं की बैठक में भारत को आजाद कराने का फैसला हुआ था। इनमें एमएन रॉय, एल्विन ट्रेन्ट रॉय, अबानी मुखर्जी रोजा फिटिंगगोव, मोहम्मद अली, मो. शफीक और एमपीबीटी आचार्य थे। 

मो. शफीक को पार्टी का महासचिव चुना गया था। माकपा द्वारा अपनी शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित पुस्तक में भी 1920 से 1925 के बीच वामपंथी नेताओं द्वारा कई बैठकों और प्रकाशनों का ब्योरा दिया गया है। एस ए डांगे, एसवी घाटगे, केएम जोगलेकर और आरएस निंबालकर ने 1923 में मुंबई से सोशलिस्ट नामक अखबार निकाला तो सिंगारावेलु चेट्टियार ने मद्रास से 1 मई 1923 को लेबर किसान गजट प्रकाशित किया।

भाकपा नहीं मानती दलीलें

भाकपा दलीलों को नहीं मानती। उसका कहना है कि सारा भ्रम मुजफ्फर अहमद की पुस्तक में छपी अपुष्ट जानकारियों के आधार पर फैला है। इसी वजह से 18 अगस्त 1959 को पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक में प्रस्ताव पारित कर 1925 को ही पार्टी का स्थापना वर्ष माना गया। इस बैठक में अजय घोष, एसए डांगे, ए के गोपालन, पीसी जोशी, बीपी रणदवे, जेडए अहमद और एम बासवपुनैया शामिल थे। बासवपुनैया द्वारा हस्तलिखित प्रस्ताव अभी भी सीपीआई के पास है।

माकपा का तर्क

माकपा इस प्रस्ताव के अस्तित्व से इनकार नहीं करती। हालांकि उसका कहना है कि नवंबर 1964 में भाकपा से अलग होने के बाद माकपा ने अपने स्थापना की प्रक्रिया सहित पुराने दल की एक कई प्रस्तावों और नीतियों की समीक्षा की। इसी के बाद उसने तय किया कि कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1925 में नहीं 1920 में हुई थी।

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