हाथरस के बाद रविवार को पंजाब पहुंचकर राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने का अधिकार दिया था, लेकिन वर्तमान सरकार उनके इस अधिकार को खत्म करना चाहती है। अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून में कुछ गड़बड़ियां हैं तो उसे दूर करने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसकी वजह से पूरी व्यवस्था को नष्ट करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एपीएमसी मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
वहीं, कांग्रेस के इस हमले को बेअसर करने के लिए भाजपा ने भी कमर कस लिया है। पार्टी ने तय किया है कि वह किसानों के घर-घर पहुंचकर नए कानून पर उन्हें जागृत करेगी। इसी क्रम में रविवार को दिल्ली भाजपा ने किसानों के घर-घर जाकर किसान बिल पर किसानों को जागरूक किया। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता, सभी सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों सहित पूरी टीम ने राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में जाकर किसानों को नए कानून के बारे में जानकारी दिया और उन्हें बताया कि यह किस प्रकार उन्हें आर्थिक आजादी देने वाला साबित हो सकता है।
दिल्ली भाजपा के महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अमर उजाला को बताया कि किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस ने हमेशा दोहरा रवैया अपनाया है। वह किसानों के हितों के नाम पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाती रही है। भूमि अधिग्रहण कानून पर उसका रवैया क्या था, यह लोग अभी भी भूले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का कृषि के बारे में कितना ज्ञान है, यह देश ने बार-बार देख लिया है। जो लोग यह नहीं जानते हैं कि आलू जमीन के नीचे पैदा होता है या पेड़ पर फलता है, वे लोगों को किसान बिल के बारे में ज्ञान न दें।
दिल्ली में लगभग 365 गांव हैं। इनमें से 100 से ज्यादा गांवों में आज भी किसान खेती करते हैं और विभिन्न फसलें उगाते हैं। शेष गांवों में आवासीय कालोनियां बनाकर लोग रहने लगे हैं या उनकी भूमि पर अन्य व्यावसायिक कार्य कर रहे हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि कृषि बिल पर कांग्रेस का विरोध किसानों के हित के लिए नहीं अपने राजनैतिक हित से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसानों की फसल का उचित मूल्य दिलाकर उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत करने का काम करती है।