इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के वरिष्ठ डॉक्टर नरेंद्र सैनी का कहना है कि शुगर मरीजों की रक्त नाड़ियां सिकुड़ जाती हैं। ऐसे में शरीर में दबाव बढ़ने पर उनमें ऑक्सीजन का प्रवाह कम होने की आशंका ज्यादा होती है। डॉ. सैनी कहते हैं कि कोरोना मरीजों के फेफड़ों को सिकोड़ देता है, जिससे स्वच्छ हवा या ऑक्सीजन को शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाना मुश्किल होता जाता है। इसलिए शुगर मरीजों, मोटापे के शिकार लोगों या ह्रदय रोगियों पर कोरोना ज्यादा घातक साबित होता है और इसीलिए ऐसे लोगों को शुगर कंटेंट वाली चीजों को खाने से बचने की सलाह दी जाती है।
सटीक तौर पर इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि केवल शुगर कंटेंट न खाने से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है। चूंकि सभी खाद्य पदार्थों में कम या अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, शुगर और प्रोटीन होता ही है, इसलिए सलाह दी जाती है कि शुगर मरीज केवल वही पदार्थ खाएं जिनमें शुगर कंटेंट अपेक्षाकृत कम मात्रा में उपलब्ध हों।
विशेषज्ञों की सलाह है कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी अपना भोजन सामान्य बनाए रखने की कोशिश करें। अगर शुगर, हाइपरटेंशन या हृदयरोग के मरीज हैं तो शुगर कंटेंट कम रखने वाली चीजें खाएं। भोजन में प्रोटीन B, C और जिंक की अधिकता वाले भोज्य पदार्थ, दालें, पनीर या अंडे जैसी चीजें ही खाएं।
कोरोना में बुखार के कारण शरीर का तापमान बढ़ जाता है, इसलिए समय-समय पर पानी पीते रहें। लगातार पानी पीने से पेशाब के साथ हानिकारक रासायनिक तत्त्व (टॉक्सिक कंटेंट) बाहर निकलते रहेंगे, जिससे शरीर ज्यादा सुचारू रूप से काम करता रहेगा।
वायरस से निबटने के ये हैं तरीके
कोरोना वायरस अलग-अलग सतह पर दो से पांच दिनों तक जीवित रह सकता है। इस बीच अगर कोई उसके संपर्क में न आए तो वह स्वत: समाप्त हो जाता है। ऐसे में सबके द्वारा केवल मास्क पहनकर, शारीरिक दूरी बनाए रखकर, मेलमिलाप या सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकार ही कोरोना संक्रमण को स्थाई तौर पर खत्म करने की कोशिश की जा सकती है। इस बीच सभी को वैक्सीन लगवाकर संक्रमण से बचने की कोशिश करनी चाहिए।