1. केंद्र और राज्य, इन सिफारिशों को तुरंत लागू करें
केंद्र और सभी राज्यों को मिलकर ऑक्सीजन सप्लाई, जरुरी दवाओं और इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करनी होगी। सरकारों को कोई ऐसी एक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जहां से हर समय मदद मिलती रहे।
सभी तरह के अस्पतालों में एक हेल्प डेस्क स्थापित किया जाए। यहां पर मरीज को यह पता चलेगा कि उसे अस्पताल में दाखिल होने की जरुरत है या घर पर उसका इलाज हो सकता है। हेल्प डेस्क पर सभी अस्पतालों की सूची लगा दी जाएगी। कहां पर सामान्य बेड है, ऑक्सीजन है या नहीं, आईसीयू बेड, कोविड टेस्टिंग के रेट और दूसरी हेल्थ सेवाओं का ब्यौरा इन हेल्प डेस्क पर रहेगा। देश के सभी राज्यों एवं जिलों को जोड़कर एक डैश बोर्ड बनाया जाए, जिस पर कोविड को लेकर तमाम तरह की जानकारियां रहेंगी।
बोर्ड पर यह सूचना भी रहेगी कि वेंटिलेटर सुविधा कहां पर है। कालाबाजारी रोकने के लिए दवाओं व इंजेक्शन का रेट तय कर दिया जाए। प्राइवेट अस्पतालों के रिकॉर्ड की नियमित जांच हो, ताकि ये पता चलता रहे कि कोई अस्पताल बेड की संख्या को लेकर गलत जानकारी तो नहीं दे रहा है। ऑक्सीजन सप्लाई, उत्पादन और स्थानीय वितरण प्रणाली को बढ़ाया जाए। इनका वितरण जरुरत के मुताबिक हो।
श्मशान घाट पर ऐसा प्रबंध हो ताकि वेटिंग टाइम कम से कम हो जाए। हेल्थ केयर सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाएं ली जाए। मेडिकल स्टूडेंट जो, ग्रेजुएशन या पीजी में हैं, उनकी सेवाएं कोरोना महामारी में ली जा सकती हैं।
कोरोना संक्रमण, इलाज, दवा, कौन-सी लहर है, मास्क, सार्वजनिक गतिविधि और अस्पतालों एवं लॉकडाउन से जुड़े प्रोटोकॉल की जानकारी देने के लिए एक ऐसा माध्यम चुना जाए, जिसकी पहुंच समाज के हर तबके तक हो। मार्केट में भीड़ रोकने के लिए जो सिस्टम लागू किया गया, उसे लेकर एक फॉलोअप रिपोर्ट तैयार की जाए।
जैसे लॉकडाउन या कर्फ्यू का कितना फायदा हुआ है, ये लोगों को पता होना चाहिए। सरकार, काउंसलरों की मदद से एक ऐसा प्रोग्राम शुरु करे, जो वर्चुअल और फोन पर उपलब्ध रहे। इसमें कोरोना की सही जानकारी देना शामिल रहेगा। जहां पर संक्रमण का खतरा है, वहां पर लोगों का इक्ट्ठा होना बंद कर दिया जाए।
वैक्सीन कवरेज को लेकर किसी तरह का भेदभाव न हो। संभव हो तो देश में इसे निशुल्क लगाया जाए। वैक्सीन की सप्लाई चेन की समीक्षा की जाए। माइग्रेंट, कैदी, श्रमिक और ऐसे लोग जिनके पास आधार कार्ड भी नहीं हैं, यानी बेघर लोग हैं, इन सभी के लिए वैक्सीन का प्रावधान किया जाए। ये लोग सबसे अधिक रिस्क पर होते हैं।
अस्पतालों में भर्ती या घर में क्वारंटीन लोगों के लिए स्थानीय भाषा में एक ब्रोशर तैयार किया जाए। इसमें कोरोना संक्रमण रोकने का प्रबंधन और सरकार की गाइडलाइन रहेंगी। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक टोल फ्री नंबर दिया जाए। यदि घर में कोई मरीज है तो उसे नियमित तौर पर चेक करना होगा। ऐसी जानकारी के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का खूब इस्तेमाल किया जाए।
मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि सभी सरकारी लैब में निशुल्क टेस्ट हो। लंबी लाइनों से बचा जाए और घर आकर लोगों के सेंपल लिए जाए। 24 घंटे में रिपोर्ट दे दें। सरकार को कोरोना की तीसरी लहर के बारे में पहले से ही सारी जानकारी एकत्रित करनी चाहिए। अगर ये लहर आती है तो उससे कैसे निपटा जाएगा। केंद्र व राज्यों के पास कौन से संसाधन हैं। मेडिकल अपग्रेडेशन कहां जरूरी है, इन सबके बारे में पहले से ही सारी तैयारी कर ली जाए।
सभी अस्पतालों को डब्लूएचओ से सीख लेनी होगी कि कोरोना के दौरान क्लीनिकल मैनजमेंट कैसे किया जाए। कोरोना के दौरान दूसरी बीमारी वाले मरीजों का इलाज कैसे हो, यह व्यवस्था पहले से ही तैयार कर ली जाए। एम्स और आईसीएमआर की टॉस्क फोर्स द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाए। खासतौर पर दवा लिखते वक्त डॉक्टर यह बात ध्यान रखें। मरीजों से भी आग्रह है कि वे बिना किसी की सलाह लिए कोई दवा या इंजेक्शन न लें। एंबुलेंस सर्विस, सामान्य रेट पर मिले। इसके लिए एक एप तैयार किया जाए।
प्राइवेट अस्पतालों का ऑडिट कराया जाए कि वे कहीं ज्यादा पैसा तो नहीं ले रहे हैं। खासतौर पर, ऐसे सभी बिलों की जांच पड़ताल हो, जो डेढ़ लाख रुपये तक या इससे अधिक हैं। आरटी पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट देरी से आती है तो उस समय तक लोगों को कोविड मरीजों की तरह माना जाएगा। इलाज के लिए पहचान पत्र की शर्त को जरूरी न माना जाए।
देश में जितने भी ट्रेंड वॉलंटियर हैं, उन्हें एकत्रित किया जाए। उनकी सेवाएं कोविड संक्रमण को रोकने में ली जाएं। वे घर पर जाकर मरीजों की मदद कर सकते हैं। क्वारंटीन सेंटर, होमआइसोलेशन व कांटेक्ट ट्रेसिंग आदि कार्यों में भी इन वॉलंटियर की सेवाएं ली जा सकती हैं।
कोविड केस की रिपोर्ट, डेथ रिपोर्ट और इलाज, ये सभी रिपोर्ट समय से फाइल की जाएं। जो लोग बेघर हैं, उनके लिए राज्य सरकार, केंद्रशासित प्रदेश, स्थानीय स्वशासन संस्थाएं और एनजीओ आदि, रहने, खाने-पीने और इलाज का इंतजाम करें। यह योजना तब तक जारी रहे, जब तक कोरोना संक्रमण पूरी तरह खत्म न हो जाए।
एनएचआरसी की टोल फ्री हेल्पलाइन पर लोगों को अपने अधिकारों की पूरी जानकारी समय-समय पर मिलती रहे। इसी हेल्पलाइन पर लोग अपनी शिकायत दे सकते हैं। अस्पताल के रिस्सेपशन पर कोविड चार्टर लगाया जाए। इसमें मरीजों और अस्पताल की जानकारी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और किसी दूसरी सरकारी एजेंसी द्वारा जारी की गई एडवायजरी शामिल है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी गाइडलाइन में कहा है कि सितंबर 2020 में जारी की गई हेल्थ एडवायजरी में बताए गए प्रावधानों को लागू किया जाए। सेक्शन 13.1 से 13.9 तक ये प्रावधान शामिल किए गए हैं। मौजूदा हालत में यह एडवायजरी हर जगह पर लागू की जाए। फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर की वैक्सीन सबसे पहले की जाए।
इन्हें पीपीई किट और मास्क उपलब्ध कराया जाए। कोरोना की जंग में आशा वर्कर और आंगनवाड़ी वर्कर, जिन्होंने कोरोना की लड़ाई में अहम योगदान दिया है, और दे रही हैं, उनके लिए इंश्योरेंस कवर को आगे बढ़ाया जाए। राज्य, केंद्रशासित प्रदेश या किसी दूसरी जगह पर अगर कोई ऐसी तकनीक नजर आती है जो कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ पाने में सक्षम है तो उसे बिना किसी देरी के सारे देश में लागू कर देना चाहिए।