सीजेआई रमण ने कानून मंत्री किरण रिजिजू की कामकाज की शैली पर भी मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ' जब वे (रिजिजू) मुझसे मिले तो लगा कि वे कॉलेज के छात्र हैं। लेकिन मैं उनकी उम्र नहीं पूछना चाहता। कानून मंत्री ने बताया कि मैंने लॉ डिग्री ली है, लेकिन कानून का अभ्यास करने का अनुभव नहीं है, तो मैंने उनसे यही कहा कि यह तो और भी अच्छा है, क्योंकि तब आप जजों के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखेंगे।'
अपने भाषण में केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, 'जब मैं सीजेआई रमण से पहली बार मिला तो मैं उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानता था। मैंने उनके बारे में अपने दोस्तों और मीडिया से सुना था। अपनी पहली बातचीत में मैंने महसूस किया कि हमारे पास ऐसे सीजेआई हैं, जिन पर हमें पूरा भरोसा और आस्था है। सीजेआई रमण उच्च सत्यनिष्ठा के व्यक्ति साबित हुए हैं जो न्यायपालिका के लिए एक नया सवेरा हैं।'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस बीआर गवई ने सीजेआई एनवी रमण को असाधारण बताया और उनकी तुलना मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से की। एक बार में ही सुप्रीम कोर्ट में नौ जजों की नियुक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।
जस्टिस गवई ने कहा कि जस्टिस रमण भारतीय न्यायपालिका के एक सच्चे टीम लीडर हैं। उन्हें सचमुच सामान्य लोगों और वंचितों की चिंता है। वह सभी जजों से अपने भाई की तरह व्यवहार करते हैं। वह एक महान इंसान हैं।
कार्यक्रम में जस्टिस विनीत शरण ने कहा, 'विभिन्न हाईकोर्ट में एक बार में 68 जजों की नियुक्ति की सिफारिश सीजेआई रमण की ओर से उठाया गया एक बड़ा कदम है। सीजेआई ने दस साल की एक बच्ची के पत्र को भी जनहित याचिका में बदल दिया।' बता दें, हाल ही में एक लड़की ने सीजेआई को कोर्टरूम सुनवाई शुरू करने के लिए पत्र लिखा था। उसने पत्र में कहा था कि हर तरह के व्यवसाय और स्कूल चालू हो गए हैं तो कोर्ट क्यों नहीं?